आयुर्वेद-यूनानी दवाओं के मानकीकरण पर फोकस, देशभर से जुटे विशेषज्ञ और नियामक
आयुष क्षेत्र में गुणवत्ता सुधार की बड़ी पहल, 5 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
Ministry of AYUSH के अंतर्गत कार्यरत Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy (पीसीआईएमएंडएच) द्वारा आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी एवं होम्योपैथी (एएसयू एंड एच) औषधियों की गुणवत्ता और नियामक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 5 दिवसीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह कार्यक्रम 18 से 22 मई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है।
इस राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में देशभर से औषधि नियंत्रक, ड्रग इंस्पेक्टर, शोधकर्ता, वैज्ञानिक, प्रोफेसर, गुणवत्ता नियंत्रण विशेषज्ञ और आयुष दवा निर्माण इकाइयों से जुड़े प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य एएसयू एंड एच क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान, नियामक समझ और गुणवत्ता मानकों को मजबूत करना है।
उद्घाटन सत्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की मुख्य लेखा नियंत्रक जसपाल कौर प्रद्योत ने आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों और उन्नत उपकरणों के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के मानकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं आयुष मंत्रालय के राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के निदेशक डॉ. अब्दुल कयूम ने भारतीय फार्माकोपिया और फॉर्मुलरी की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को भारत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को जीएमपी, एनएबीएल मान्यता, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली, हर्बल दवाओं के मानकीकरण, फार्माकोग्नॉस्टिक और फाइटोकेमिकल मूल्यांकन, माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्टिंग और औषधियों की शेल्फ लाइफ जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रतिभागियों को नोएडा स्थित Dr. Willmar Schwabe India Pvt. Ltd. तथा गाजियाबाद स्थित Hamdard Laboratories India का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि उन्हें आधुनिक विनिर्माण तकनीकों और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की वैश्विक विश्वसनीयता बढ़ाने और भारत को एएसयू एंड एच औषधियों के मानकीकरण में विश्व नेतृत्व दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।



