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झांसी के दो मंदिरों के विकास पर 58 लाख खर्च होंगे

निश्चय टाइम्स, लखनऊ। बुंदेलखंड का झांसी जनपद विविधताओं से भरा हुआ है। वीरों की धरती झांसी धार्मिक पर्यटन में भी विशेष स्थान रखता है। जनपद के टौरिया नरसिंह राव क्षेत्र स्थित प्राचीन श्री श्री 1008 राधा कृष्ण एवं मनकामेश्वर मंदिर स्वयं में अनूठा है। श्री श्री 1008 राधा कृष्ण मंदिर को प्रेम की प्रतिमूर्ति के रूप में पूजा जाता है। उप्र0 पर्यटन विभाग मंदिर का पर्यटन विकास करने जा रही है, जिसके लिए धनराशि स्वीकृत हुई है।
यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया, धार्मिक पर्यटन में प्रदेश नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है। झांसी का श्री श्री 1008 राधा कृष्ण एवं मनकामेश्वर मंदिर अपनी ऐतिहासिकता और विशिष्ट धार्मिक पहचान की वजह से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस परियोजना के तहत स्थल के सौंदर्यीकरण, सुविधाओं के विकास, आगंतुकों के लिए आवश्यक संरचनाओं सहित अन्य कार्य किया जाएगा। इसके अलावा, मूलभूत सुविधाएं जैसे स्वच्छता, बैठने की व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था तथा सड़कों के सुदृढ़ीकरण आदि पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
जयवीर सिंह ने बताया कि झांसी जिले के ऐतिहासिक टौरिया नरसिंह राव क्षेत्र स्थित प्राचीन स्थल के पर्यटन विकास का कार्य शीघ्र ही आरंभ होने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर कुल 57.95 लाख रुपए की लागत आएगी। मंदिर में भक्तों को भगवान श्री कृष्ण और राधा रानी के दर्शन होते हैं। अपने आराध्य के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दराज के इलाकों से आते हैं। यहाँ प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक झांसी आते हैं। पर्यटकों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है जो मंदिर दर्शन को अवश्य जाते हैं। जन्माष्टमी सहित अन्य अवसरों पर प्राचीन श्री श्री 1008 राधा कृष्ण मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। इसी तरह, मनकामेश्वर मंदिर का भी पर्यटन विकास होने जा रहा है। पर्यटक, रेल और सड़क मार्ग के जरिए आसानी से इन स्थलों तक पहुंच सकते हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि झांसी का श्री श्री 1008 राधा कृष्ण एवं मनकामेश्वर मंदिर हमारी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। मंदिर के सौंदर्यीकरण और पर्यटक सुलभता के लिए 58 लाख रुपए की राशि स्वीकृत हुई है। इस पहल का उद्देश्य न केवल तीर्थयात्रियों एवं श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव प्रदान करना है, बल्कि झांसी को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विश्व मानचित्र पर स्थापित भी करना है। इन प्रयासों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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