ग्राहकों की भाषा में संवाद से ही बढ़ेगा विश्वास- महाप्रबंधक दिपेश राज
13 भारतीय भाषाओं में बैंकिंग सेवाएं दे रहा SBI; उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभागों को मिली 'राजभाषा शील्ड', गृह पत्रिका 'वातायन' का विमोचन

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क:
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के स्थानीय प्रधान कार्यालय, लखनऊ में राजभाषा कार्यान्वयन समिति की तिमाही बैठक का धुआंधार आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता लखनऊ मंडल के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) श्री दिपेश राज ने की। बैठक के दौरान कार्यालय के सभी प्रभागों और विभागों में राजभाषा हिन्दी में किए जा रहे कार्यों की गहन समीक्षा की गई और भविष्य में बैंकिंग को आम जनमानस के और करीब ले जाने का संकल्प लिया गया।
लोकभाषा और मातृभाषा ही असली पहचान: दिपेश राज बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य महाप्रबंधक श्री दिपेश राज ने एक बड़ा और प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा और लोकभाषा ही किसी भी व्यक्ति की असली पहचान और उसकी सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला होती है। भक्तिकालीन महाकवि विद्यापति के प्रसिद्ध कथन ‘देसिल बयना सब जन मिट्ठा’ (अपनी भाषा सबको मीठी लगती है) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लोकभाषा सबसे अधिक आत्मीय और प्रभावी होती है। उन्होंने बैंक अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि वे ग्राहकों के साथ उनकी अपनी सहज भाषा में ही संवाद (कम्युनिकेशन) को पहली प्राथमिकता दें।
13 क्षेत्रीय भाषाओं में डिजिटल बैंकिंग का जाल ग्राहकों की सुविधा का हवाला देते हुए मुख्य महाप्रबंधक ने बताया कि एसबीआई की डिजिटल सेवाएं आज केवल हिंदी या अंग्रेजी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि देश की विविधता को देखते हुए ये 13 प्रमुख भारतीय भाषाओं में उपलब्ध हैं। बैंक की सभी तकनीकी सुविधाओं को भी तेजी से बहुभाषी स्वरूप में अपग्रेड किया जा रहा है।
इस गौरवशाली अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक ने मंडल राजभाषा विभाग द्वारा प्रकाशित होने वाली तिमाही गृह पत्रिका ‘वातायन’ के नए अंक का विमोचन किया। साथ ही, हिंदी में बेहतरीन काम करने वाले विभागों को ‘राजभाषा शील्ड’ देकर सम्मानित किया गया। बैठक में महाप्रबंधक श्री कौशलेंद्र कुमार सहित सभी उप महाप्रबंधक मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक महाप्रबन्धक (राजभाषा) श्री दिवाकर मणि ने किया और धन्यवाद ज्ञापन मंडल विकास अधिकारी श्री धीरेन्द्र महे द्वारा किया गया।



