AMU में गरजे राज्यसभा उपसभापति हरिवंश; बोले— “राष्ट्रीय प्रगति के लिए आधुनिक ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरूरी”
सर सैयद मेमोरियल लेक्चर में गूंजा डिजिटल इंडिया का डंका; 2014 के बाद देश में हुआ तकनीक का लोकतंत्रीकरण

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क:
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के प्रतिष्ठित मंच से देश की तकनीकी और सामाजिक प्रगति का एक नया खाका खींचा गया है। राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश ने विश्वविद्यालय की सर सैयद अकादमी द्वारा आयोजित वार्षिक व्याख्यानमाला में “सामाजिक परिवर्तन में प्रौद्योगिकी की भूमिका: भारतीय परिप्रेक्ष्य” विषय पर सर सैयद अहमद स्मृति व्याख्यान दिया। इस बौद्धिक संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के शीर्ष शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
सर सैयद की दूरदर्शिता और आधुनिक तकनीक का मेल अपने संबोधन में उपसभापति श्री हरिवंश ने एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खान की सुधारवादी सोच को याद किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह सर सैयद ने अपने दौर में आधुनिक शिक्षा की वकालत की थी, उसी तरह आज के दौर में भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाना देश की प्रगति के लिए सबसे जरूरी है। वैश्विक उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि कैसे तकनीक ने इतिहास में बड़े-बड़े समाजों को बदलने का काम किया है।
डिजिटल विभाजन को पाटने की जोरदार अपील श्री हरिवंश ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि चूंकि तकनीक सामाजिक बदलाव का सबसे बड़ा हथियार है, इसलिए इसका फायदा देश के हर वर्ग और आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने डिजिटल विभाजन (डिजिटल डिवाइड) को खत्म करने की बात कही ताकि तकनीकी नवाचार भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक वास्तविकताओं के साथ कदमताल कर सके।
2014 के बाद आया बड़ा बदलाव समकालीन भारत का जिक्र करते हुए उपसभापति ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में नई तकनीकों के आने से सामाजिक समावेशन (Social Inclusion) को अभूतपूर्व गति मिली है। आज सरकार एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है। इन प्रयासों ने देश में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करते हुए सही मायनों में ‘प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण’ किया है।



