
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के भुगतान में वर्षों से चली आ रही देरी की समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब सभी कार्यरत केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (CPSU) एमएसएमई से खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं के सभी बिलों का निपटान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अधिकृत ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) प्लेटफॉर्म के माध्यम से करेंगे।
30 जून 2026 को जारी अधिसूचना के जरिए केंद्रीय बजट 2026-27 की इस महत्वपूर्ण घोषणा को लागू कर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य लाखों एमएसएमई इकाइयों को समय पर भुगतान, बेहतर नकदी प्रवाह और बिना संपार्श्विक कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना है।
सरकार के अनुसार देश में 8.70 करोड़ से अधिक पंजीकृत एमएसएमई करीब 38 करोड़ लोगों को रोजगार दे रहे हैं। इसके बावजूद भुगतान में देरी उनकी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई थी। अब TReDS के जरिए स्वीकृत बिलों को नियत तिथि से पहले ही बैंक और वित्तीय संस्थानों के माध्यम से डिस्काउंट कराकर नकदी प्राप्त की जा सकेगी।
इस व्यवस्था में बैंक और एनबीएफसी प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर बिलों का वित्तपोषण करेंगे, जिससे एमएसएमई को कम ब्याज दर पर शीघ्र कार्यशील पूंजी उपलब्ध होगी। यह सुविधा बिना किसी गारंटी (Collateral-Free) और Without Recourse आधार पर मिलेगी।
सरकार ने सभी CPSU को TReDS पर पंजीकरण, भुगतान विवरण सार्वजनिक करने तथा वार्षिक ऑडिट के दौरान वैधानिक प्रमाणन भी अनिवार्य किया है। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
वर्तमान में RXIL, M1xchange, Invoicemart, C2TReDS और DTX सहित पांच अधिकृत TReDS प्लेटफॉर्म संचालित हैं। इन प्लेटफॉर्मों पर बीजक डिस्काउंटिंग का कारोबार वित्त वर्ष 2021-22 के ₹40,000 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹3.47 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम एमएसएमई क्षेत्र की नकदी संकट की समस्या को काफी हद तक कम करेगा और समयबद्ध भुगतान की नई संस्कृति स्थापित करेगा।



