उत्तर प्रदेश

सरकारी वादों के बीच बिजली बिलों के बोझ से हलकान बुनकर

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

उत्तर प्रदेश के खादी व हथकरघा उद्योग मंत्री राकेश सचान की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद भी बुनकरों के सिर से बिजली संकट का काला साया छंटता नज़र नहीं आ रहा है। योगी सरकार की ‘अटल बिहारी वाजपेयी पावरलूम बुनकर विद्युत फ्लैट रेट योजना’ के विस्तार की चर्चाओं के बीच लाखों बुनकर पुराने बिलों, भारी-भरकम बकाए और बिजली दरों की विसंगतियों से लगातार कराह रहे हैं।

सब्सिडी के दावों के बावजूद बकाया का पहाड़

लखनऊ के डालीबाग स्थित खादी भवन में आयोजित बैठक में प्रतिनिधियों ने खुलकर आक्रोश जताया। बुनकरों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा हर साल लगभग ₹600 करोड़ का वित्तीय भार वहन करने के बड़े-बड़े दावों के बावजूद उनके बिजली बिलों में भारी-भरकम राशि बकाया दिख रही है। 31 मार्च 2023 तक के लाभ और सब्सिडी समायोजन में बरती गई प्रशासनिक लापरवाही ने छोटे कारीगरों का जीना मुहाल कर दिया है।

20 किलोवॉट के विस्तार में वित्तीय व नीतिगत पेंच

सरकार योजना के दायरे को 5 किलोवॉट से बढ़ाकर 20 किलोवॉट करने का ताना-बाना बुन रही है, जिससे वार्षिक वित्तीय दायित्व ₹789 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। हालाँकि, छोटे बुनकरों को अंदेशा है कि इस बड़े फेरबदल की आड़ में 94 प्रतिशत आबादी वाले 0 से 5 किलोवॉट श्रेणी के अति-गरीब कारीगरों का हक छिन सकता है और उन पर अनुचित आर्थिक दबाव डाला जा सकता है।

समाधान के नाम पर केवल आश्वासनों और अभियानों का पुलिंदा

बकाए के निस्तारण के लिए ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (OTS) और अगस्त में विशेष जांच अभियान चलाने की सिर्फ बातें कही गई हैं। ब्याज और अधिभार के दलदल में फंसे बुनकरों को अब तक कोई ठोस आधिकारिक राहत नहीं मिली है। विभागीय सुस्ती और फाइलों के चक्कर में प्रदेश का पारंपरिक हथकरघा उद्योग आर्थिक बदहाली की कगार पर पहुँच चुका है।

Related Articles

Back to top button