मेडिकल डिवाइस में आत्मनिर्भरता का दावा, लेकिन कई परियोजनाएं अब भी अधूरी
हजारों करोड़ की योजनाओं के बीच क्रियान्वयन और निवेश की रफ्तार पर उठे सवाल

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
भारत को उच्च परिशुद्धता वाले चिकित्सा उपकरणों के वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं। लेकिन आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि बड़ी घोषणाओं के बावजूद कई परियोजनाएं अभी भी क्रियान्वयन के चरण में हैं, जबकि निवेश और प्रोत्साहन का पूरा लाभ जमीन पर उतरने की चुनौती बरकरार है।
₹3,420 करोड़ की पीएलआई, लेकिन भुगतान केवल ₹266 करोड़
सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना का कुल परिव्यय ₹3,420 करोड़ है। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2024-25 तक केवल ₹266.64 करोड़ का प्रोत्साहन जारी किया गया। यह आंकड़ा सवाल खड़ा करता है कि क्या उद्योग अपेक्षित गति से उत्पादन और निवेश बढ़ा पा रहा है।
मेडिकल डिवाइस पार्क अभी निर्माणाधीन
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित किए जा रहे हैं, लेकिन तीनों परियोजनाएं अभी भी कार्यान्वयन के चरण में हैं। सरकार ने ₹209.80 करोड़ का केंद्रीय अनुदान जारी किया, जबकि उसका उपयोग ₹177.98 करोड़ तक ही पहुंच सका।
परियोजनाएं स्वीकृत, लेकिन उत्पादन का इंतजार
सामान्य परीक्षण सुविधाओं, मेडिकल ग्लास, बायोकम्पैटिबिलिटी लैब और प्रोटोटाइपिंग सेंटर जैसी अधिकांश परियोजनाएं अभी भी “कार्यान्वयनाधीन” हैं। यानी उद्योग को इन सुविधाओं का पूर्ण लाभ मिलने में अभी समय लगेगा।
आयात निर्भरता कम करने की चुनौती बरकरार
सरकार ने आयात पर निर्भरता घटाने के लिए 24 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक उच्च तकनीक वाले उपकरणों का बड़े पैमाने पर घरेलू उत्पादन नहीं बढ़ता, तब तक भारत की आयात निर्भरता पूरी तरह कम नहीं होगी।
आत्मनिर्भरता का अगला इम्तिहान
सरकार का दावा है कि एमआरआई, सीटी स्कैन, स्टेंट, हार्ट वाल्व और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों का घरेलू उत्पादन शुरू हो चुका है। फिर भी वास्तविक सफलता का पैमाना यही होगा कि भारत न केवल घरेलू मांग पूरी करे, बल्कि वैश्विक निर्यात बाजार में भी प्रतिस्पर्धी बने। विशेषज्ञों के अनुसार अब सबसे बड़ी चुनौती योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि उनका समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन है।



