गन्ना माफियाओं पर डिजिटल शिकंजा
भू-अभिलेखों से होगा गन्ना क्षेत्रफल का मिलान, फर्जीवाड़े पर चलेगी तकनीक की धार

गन्ना माफियाओं पर डिजिटल शिकंजा
पारदर्शिता की नई इबारत
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश में गन्ना सर्वेक्षण और सट्टा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी एवं किसान हितैषी बनाने की दिशा में योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब स्मार्ट गन्ना किसान (SGK) पोर्टल पर दर्ज गन्ना क्षेत्रफल का मिलान भू-राजस्व अभिलेखों से एपीआई (API) आधारित तकनीक के माध्यम से किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य फर्जी गन्ना क्षेत्रफल, गलत प्रविष्टियों और तथाकथित गन्ना माफियाओं पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
तकनीक करेगी सच की पहचान
गन्ना आयुक्त के निर्देश पर अयोध्या, देवीपाटन, गोरखपुर और देवरिया परिक्षेत्र के अधिकारियों एवं फील्ड कार्मिकों के लिए वर्चुअल प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में उप गन्ना आयुक्त, जिला गन्ना अधिकारी, गन्ना विकास निरीक्षक, सचिव एवं पर्यवेक्षकों को डिजिटल मैपिंग, डाटा सत्यापन और समयबद्ध क्रियान्वयन की विस्तृत जानकारी दी गई।
पहले चरण में बड़े रकबे की जांच
विशेष अभियान के प्रथम चरण में एक हेक्टेयर से अधिक गन्ना क्षेत्रफल वाले किसानों के डाटा का सत्यापन किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे बड़े क्षेत्रफल के नाम पर की जाने वाली फर्जी प्रविष्टियों पर रोक लगेगी और वास्तविक किसानों को ही योजनाओं एवं गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा।
63 बिंदुओं पर किसानों को मिलेगी जानकारी
अभियान के दौरान किसानों को गन्ना सर्वे एवं सट्टा से जुड़े 63 महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। यदि किसी किसान को सर्वेक्षण या सट्टा संबंधी कोई आपत्ति होगी, तो उसका मौके पर ही निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे किसानों को विभागीय कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
जनप्रतिनिधियों का भी मिलेगा सहयोग
गन्ना विकास विभाग ने इस अभियान को जनभागीदारी से सफल बनाने के लिए सहकारी गन्ना विकास समितियों के अध्यक्षों एवं जनप्रतिनिधियों का सहयोग लेने का निर्णय लिया है। विभाग का विश्वास है कि राजस्व अभिलेखों और एसजीके पोर्टल के तकनीकी समन्वय से गन्ना सर्वेक्षण व्यवस्था अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनेगी।
डिजिटल खेती की ओर निर्णायक कदम
नई व्यवस्था केवल डाटा सत्यापन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों के हितों की सुरक्षा, समयबद्ध भुगतान व्यवस्था और पारदर्शी गन्ना प्रबंधन प्रणाली की मजबूत नींव रखने वाली ऐतिहासिक पहल साबित होगी।


