धर्म

श्री गुरु हरकिशन साहिब जी के प्रकाश पर्व पर श्रद्धा का महासंगम

शबद कीर्तन, कथा, अरदास और गुरु के अटूट लंगर में उमड़ी संगत

ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब, यहियागंज में देर रात तक गूंजता रहा गुरुबाणी का अमृत रस

‘बाला पीर’ के सेवा, करुणा और मानवता के संदेश को किया गया स्मरण

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |

लखनऊ। राजधानी के ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी, यहियागंज में शुक्रवार शाम श्री गुरु हरकिशन साहिब जी का पावन प्रकाश पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। शाम 7 बजे से रात्रि 11 बजे तक चले धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में संगत ने भाग लेकर गुरुबाणी का श्रवण किया तथा गुरु साहिब के बताए सेवा, समर्पण और मानवता के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

शबद कीर्तन से भक्तिमय हुआ वातावरण

गुरुद्वारा सचिव मनमोहन सिंह हैप्पी ने बताया कि कार्यक्रम का संयोजन डॉ. गुरमीत सिंह ने किया। इस अवसर पर रुद्रपुर से पधारे प्रसिद्ध रागी भाई गुरविंदर सिंह जी ने मधुर शबद कीर्तन प्रस्तुत कर संगत को आध्यात्मिक आनंद से सराबोर कर दिया। गुरुबाणी की स्वर लहरियों से पूरा गुरुद्वारा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब गया।

गुरु हरकिशन साहिब के जीवन से मिली सेवा की प्रेरणा

हेड ग्रंथी ज्ञानी परमजीत सिंह जी ने अपने प्रवचन में आठवें सिख गुरु श्री गुरु हरकिशन साहिब जी के जीवन, त्याग और सेवा भावना पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि मात्र आठ वर्ष की आयु में गुरुगद्दी संभालने वाले गुरु हरकिशन साहिब ने जाति, धर्म और वर्ग से ऊपर उठकर मानव सेवा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। दिल्ली में फैली महामारी के दौरान उन्होंने पीड़ितों की निस्वार्थ सेवा की, जिसके कारण उन्हें प्रेमपूर्वक “बाला पीर” के नाम से सम्मानित किया गया।

मानवता और करुणा का अमर संदेश

प्रवचन में गुरु साहिब के जीवन की अनेक प्रेरक घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया गया कि उन्होंने ज्ञान, विनम्रता और करुणा के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया कि सच्ची आस्था मानव सेवा में निहित है। गुरु साहिब की शिक्षाएं आज भी सामाजिक समरसता, परोपकार और आध्यात्मिक चेतना का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

अरदास के बाद वितरित हुआ अटूट लंगर

धार्मिक कार्यक्रम के समापन पर संगत ने सामूहिक अरदास में विश्व शांति, मानव कल्याण और सामाजिक सद्भाव की कामना की। इसके पश्चात श्रद्धालुओं को मिष्ठान प्रसाद तथा गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया। देर रात तक संगत श्रद्धा और सेवा भाव के साथ गुरु घर में नतमस्तक होती रही।

Related Articles

Back to top button