मरीज की जान बचाने की जद्दोजहद से जन्मा अनोखा नवाचार
मेदांता लखनऊ के डॉक्टरों द्वारा विकसित 'इंटीग्रेटेड इमरजेंसी स्ट्रेचर' को भारत सरकार से मिला पेटेंट पंजीकरण

निश्चय टाइम्स न्यूज़ डेस्क
हर नया आविष्कार किसी बंद प्रयोगशाला में ही जन्म ले, यह जरूरी नहीं है। कई बार गंभीर मरीजों का इलाज करते-करते अस्पताल के गलियारों और आपातकालीन कक्षों में ऐसे विचार जन्म ले लेते हैं जो चिकित्सा जगत की बड़ी समस्याओं का समाधान बन जाते हैं। ऐसा ही एक क्रांतिकारी और प्रेरणादायी कारनामा कर दिखाया है मेदांता अस्पताल, लखनऊ के आपातकालीन चिकित्सा एवं आघात देखभाल विभाग के निदेशक डॉ. लोकेन्द्र गुप्ता और उनकी विशेषज्ञ टीम ने। इस टीम द्वारा विकसित ‘समेकित आपातकालीन परिवहन स्ट्रेचर’ (Integrated Emergency Transport Stretcher) के डिजाइन को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा आधिकारिक पंजीकरण प्रदान किया गया है।
एक गंभीर घटना से उपजा अनूठा सवाल
इस आविष्कार की कहानी एक गंभीर मरीज से शुरू हुई। एक बार जब एक गंभीर रूप से बीमार मरीज को इमरजेंसी से आईसीयू में शिफ्ट किया जा रहा था, तो रास्ते में अचानक उसकी हालत बिगड़ गई और तत्काल कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) यानी सीपीआर शुरू करने की जरूरत आन पड़ी। उस वक्त जो व्यावहारिक समस्या सामने आई, उसने डॉक्टरों को सोचने पर मजबूर कर दिया—चलते हुए सामान्य स्ट्रेचर पर प्रभावी तरीके से सीपीआर देना बेहद कठिन होता है क्योंकि डॉक्टर को छाती पर सही दबाव देने के लिए पर्याप्त जगह और स्थिर आधार नहीं मिल पाता।
तभी एक साधारण सा लेकिन क्रांतिकारी सवाल मन में आया— “सीपीआर करने के लिए डॉक्टर को स्ट्रेचर पर चढ़ना ही क्यों पड़े?” बस यहीं से एक विचार का बीज पड़ा, जिसे कागजी डिजाइन से होते हुए आज भारत सरकार की कानूनी मान्यता मिल चुकी है।
एक स्ट्रेचर, जो निभाएगा कई भूमिकाएं
इस स्ट्रेचर को इस दूरदर्शी सोच के साथ डिजाइन किया गया है कि मरीज को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना उसके उपचार में बाधा न बने। एक ही स्ट्रेचर को कई चिकित्सकीय परिस्थितियों में अलग-अलग तरह से ढाला जा सकता है:
- आईसीयू की जरूरतें
- आपातकालीन उपचार और प्रभावी सीपीआर की स्थिति
- रेडियोलॉजी और विभिन्न जांच के दौरान उपयोग
- शल्य चिकित्सा (Surgery) और प्रक्रिया के वक्त
- कुर्सी और अर्ध-बैठी हुई स्थिति
- सुरक्षित परिवहन एवं स्थानांतरण
इस अत्याधुनिक स्ट्रेचर में सीपीआर के लिए विस्तारित मंच, मरीज की निरंतर मॉनिटरिंग, ऑक्सीजन व सक्शन की सुविधा, आपातकालीन सामान रखने की जगह, पारदर्शी सतह, ऊंचाई समायोजन और बैटरी बैकअप जैसी तमाम जरूरी सुविधाओं को एक ही मंच पर समाहित किया गया है।
चिकित्सकों की रोजमर्रा की चुनौती का समाधान
इस नवाचार की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे उन डॉक्टरों ने मिलकर तैयार किया है जो रोज जमीन पर गंभीर मरीजों की जान बचाने की जद्दोजहद करते हैं। इस टीम में डॉ. नयन श्रीरामुला, डॉ. उत्सव आनंद मणि, डॉ. राधिका रानी चंद्रा, डॉ. यतिन तलवार, डॉ. ओ. पी. संजीव और डॉ. सौरभ सिंह शामिल रहे। यह उपलब्धि साबित करती है कि जब जमीनी हकीकत से जुड़े चिकित्सक खुद समाधान खोजते हैं, तो वह चिकित्सा जगत के लिए मील का पत्थर साबित होता है।



