हरित हाईवे की दिशा में एनएचएआई का बड़ा कदम,
ग्रीन हाईवेज एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026 के विजेताओं की घोषणा

पौधारोपण और हरित प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मिला सम्मान
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
राष्ट्रीय राजमार्गों को केवल तेज रफ्तार यातायात का माध्यम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का मजबूत आधार बनाने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने महत्वपूर्ण पहल की है। एनएचएआई ने ‘ग्रीन हाईवेज एक्सीलेंस अवॉर्ड्स 2026’ के विजेताओं की घोषणा कर दी है। इन पुरस्कारों का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में बेहतर पौधारोपण, हरित प्रबंधन और पर्यावरण-अनुकूल कार्यप्रणालियों को बढ़ावा देना है।
पुरस्कारों के लिए देशभर से 86 नामांकन प्राप्त हुए थे। इनमें सड़क के किनारे पौधारोपण के 27, सड़क के बीच पौधारोपण के 36 और भूखंडों में पौधारोपण के 23 नामांकन शामिल थे। प्रारंभिक जांच के बाद प्रत्येक श्रेणी से पांच-पांच परियोजनाओं को अंतिम मूल्यांकन के लिए चुना गया।
तीन श्रेणियों में उत्कृष्ट परियोजनाएं
सड़क के किनारे पौधारोपण की श्रेणी में पहला पुरस्कार आंध्र प्रदेश के एनएच-16 पर चिलकलूरिपेट बाईपास के छह लेन विस्तार को मिला। दूसरा पुरस्कार गुजरात के वडोदरा-किम एक्सप्रेसवे के पाड्रा-वडोदरा खंड और तीसरा पुरस्कार एनएच-925 तथा एनएच-925ए के गगरिया-बाखासर एवं सट्टा-गंधव खंड को दिया गया। त्रिची बाईपास सहित एनएच-210, एनएच-336, एनएच-36 और एनएच-536 के रखरखाव कार्य को सांत्वना पुरस्कार मिला।
सड़क के बीच पौधारोपण श्रेणी में पहला पुरस्कार हैदराबाद-यादगिरी एनएच-163 खंड को मिला। दूसरा पुरस्कार वडोदरा-किम एक्सप्रेसवे के सनपा-पादरा खंड और तीसरा पुरस्कार वाराणसी रिंग रोड के हरहुआ-संदहा खंड को दिया गया।
भूखंड में पौधारोपण की श्रेणी में नागपुर के एनएच-44 स्थित जामठा क्लोवर लीफ और ऑक्सीजन बर्ड पार्क को पहला पुरस्कार मिला। दूसरा पुरस्कार दुहाई इंटरचेंज के भूमि पार्सल और तीसरा पुरस्कार लखनऊ-अयोध्या रोड तथा लखनऊ आउटर रिंग रोड के जंक्शन-लूप क्षेत्रों में किए गए मियावाकी पौधारोपण को दिया गया।
पौधों के जीवित रहने की दर पर विशेष जोर
मूल्यांकन के दौरान पौधों के जीवित रहने की दर को सबसे अधिक महत्व दिया गया। इसके अलावा साइट के अनुसार पौधारोपण योजना, गड्ढों का आकार, पौधों की गुणवत्ता, सुरक्षा व्यवस्था, प्रजातियों की विविधता, स्थानीय प्रजातियों का उपयोग और स्वीकृत डिजाइन के अनुसार कार्यान्वयन को भी परखा गया।
एनएचएआई ने बताया कि नामांकन के साथ जियो-टैग तस्वीरें, ड्रोन वीडियो और पौधों के जीवित रहने से जुड़ा आंकड़ा भी प्रस्तुत किया गया था। पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 2025 में ग्रीन हाईवेज पॉलिसी, 2015 के तहत की गई थी। यह पहल राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की एनएचएआई की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।



