राष्ट्रीय

जिला न्यायालयों के विकास हेतु 401.50 करोड़ की पहली किस्त जारी

न्यायिक ढांचे को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार का बड़ा कदम

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 401.50 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी कर दी है। केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-दो में आयोजित कार्यक्रम के दौरान यह राशि सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी की।

यह राशि केंद्र प्रायोजित योजना के तहत जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए दी गई है। कार्यक्रम में विभिन्न उच्च न्यायालयों तथा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।

श्री मेघवाल ने अपने संबोधन में कहा कि न्यायपालिका के लिए मजबूत और आधुनिक अवसंरचना न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वर्तमान योजना की अवधि 31 मार्च 2026 तक है, जबकि इसे 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि वादियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए न्यायालय परिसरों में प्रतीक्षा कक्ष निर्माण का प्रस्ताव भी शामिल किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान न्यायिक अवसंरचना सलाहकार समिति के गठन की जानकारी भी साझा की गई, जिसकी अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरविंद कुमार करेंगे। इसका उद्देश्य देशभर में एक समान और आधुनिक न्यायिक अवसंरचना विकसित करना है।

वीडियो प्रस्तुति में बताया गया कि योजना शुरू होने से अब तक कुल 12,844.72 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इसके परिणामस्वरूप देशभर में 6,345 न्यायालय भवन और 4,023 आवासीय इकाइयों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि हजारों परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं।

कार्यक्रम में न्यायिक सुधारों पर आधारित तीन शोध रिपोर्ट और पूर्वोत्तर भारत के जनजातीय समुदायों के पारंपरिक कानूनों पर आधारित तीन ई-पुस्तकों का भी विमोचन किया गया।

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