उत्तर प्रदेश

दूध में मिलावट का बड़ा खेल उजागर—छापेमारी में करोड़ों का माल जब्त

लाइसेंस सस्पेंड, अधिकारी निलंबित—खाद्य सुरक्षा विभाग पर उठे गंभीर सवाल

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

उत्तर प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट का बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन उत्तर प्रदेश द्वारा बुलंदशहर और सहारनपुर में चलाए गए विशेष अभियान में व्यापक अनियमितताएं उजागर हुईं।

प्रदेश स्तर पर गठित 49 प्रवर्तन टीमों ने अचानक छापेमारी करते हुए कुल 47 संचालित इकाइयों की जांच की। जांच में सामने आया कि कई प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई का अभाव, रिकॉर्ड में गड़बड़ी, और खाद्य सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कुछ इकाइयों में पुराने उत्पादों को नई तारीख डालकर दोबारा पैक किया जा रहा था।

बुलंदशहर में 35 इकाइयों से 112 नमूने लिए गए, जबकि सहारनपुर में 12 इकाइयों से 21 नमूने एकत्र किए गए। कार्रवाई के दौरान बुलंदशहर में लगभग 5.75 करोड़ रुपये मूल्य का 503.5 मीट्रिक टन दूध और दुग्ध उत्पाद जब्त किया गया। वहीं सहारनपुर में 94 लाख रुपये मूल्य का स्किम्ड मिल्क पाउडर भी कब्जे में लिया गया।

गंभीर अनियमितताओं के चलते 6 राज्य स्तरीय इकाइयों के लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जबकि 3 केंद्रीय इकाइयों के खिलाफ भी कार्रवाई की संस्तुति भेजी गई है। इसके अलावा 20 इकाइयों को सुधार नोटिस जारी किया गया है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि विभाग के अंदर भी गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। सहारनपुर के अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी को निलंबित कर दिया गया, जबकि अन्य अधिकारियों को मुख्यालय से संबद्ध किया गया है।

यह पूरा मामला न केवल मिलावटखोरी की गंभीरता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी चूक हो रही है। आम जनता के स्वास्थ्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


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