राजनीति
बसपा में ‘स्वार्थ’ की छुट्टी, युवाओं की एंट्री: मायावती ने दिया 2007 जैसा सम्मान लौटाने का भरोसा

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के भीतर चल रहे बदलावों और भविष्य की रणनीतियों को लेकर एक बेहद सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। उनका यह बयान उन तमाम अटकलों पर विराम लगाता है जो पार्टी से नेताओं के निष्कासन या पलायन को लेकर लगाई जा रही थीं। बसपा प्रमुख ने साफ कर दिया है कि पार्टी अब ‘नेताओं’ की नहीं, बल्कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों पर चलने वाले ‘समर्पित कार्यकर्ताओं’ की फौज पर भरोसा कर रही है।
मायावती के संदेश की प्रमुख बातें:
- अवसरवादियों पर सीधा प्रहार: मायावती ने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण समाज या अन्य वर्गों के जो नेता पार्टी से निकाले गए हैं या अपने निजी स्वार्थ के लिए सत्ताधारी दलों में गए हैं, उन्होंने केवल अपना फायदा देखा। ऐसे अवसरवादी लोगों ने बसपा सरकार के दौरान सिर्फ अपने परिवारों का भला किया और समाज को पार्टी से जोड़ने के बजाय निष्क्रियता दिखाई, जिसका नुकसान बसपा को पिछले चुनावों में उठाना पड़ा।
- तैयार हो रही है युवाओं की ‘नई नर्सरी’: निराशा को पीछे छोड़ते हुए, बसपा अब एक नई ऊर्जा के साथ मैदान में है। मायावती ने बताया कि पार्टी के पुराने और निष्ठावान सिपाही अब कर्मठ, ईमानदार और मिशनरी सोच वाले युवाओं की एक नई ‘नर्सरी’ तैयार कर रहे हैं। ये नए चेहरे संविधानवादी संघर्ष में पार्टी का मजबूत स्तंभ बनेंगे।
- ब्राह्मण समाज और सर्वसमाज को आश्वासन: मायावती ने ब्राह्मण समाज को विशेष रूप से आश्वस्त किया है कि वे पूरी मजबूती से बसपा के साथ जुड़े रहें। जो भी मेहनत करेगा, उसे चुनाव में टिकट और सरकार बनने पर 2007 की तर्ज पर पूरा मान-सम्मान दिया जाएगा।
- दलितों के कंधों पर अहम जिम्मेदारी: उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘सर्वसमाज’ को साथ लेकर चलने वाली इस पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अब दलित समाज को निभानी है। बसपा हमेशा सर्वसमाज के खूबसूरत गुलदस्ते की तरह सजी रहेगी।



