उत्तर प्रदेश

आबकारी विभाग की कमाई बढ़ी, लेकिन अवैध कारोबार पर लगाम अब भी ढीली!

राजस्व रिकॉर्ड के पीछे सच्चाई क्या? अवैध शराब का बढ़ता जाल सरकार के दावों पर सवाल

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क


प्रदेश सरकार जहां आबकारी विभाग की रिकॉर्ड राजस्व वसूली को बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत कई गंभीर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 57,722.26 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होना और पिछले वर्ष की तुलना में 9.79 प्रतिशत की वृद्धि दिखाना निश्चित रूप से आंकड़ों में मजबूती दर्शाता है, लेकिन इसके समानांतर अवैध शराब के मामलों में भारी संख्या चिंता का विषय बनती जा रही है।

आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 तक प्रदेश में 1,18,978 अवैध शराब के मामले दर्ज हुए, जो यह संकेत देते हैं कि अवैध नेटवर्क लगातार सक्रिय है। 30.94 लाख लीटर अवैध शराब की बरामदगी और 21,446 गिरफ्तारियां इस बात का प्रमाण हैं कि समस्या नियंत्रण में नहीं बल्कि विस्तार की ओर बढ़ रही है। सवाल यह उठता है कि यदि प्रवर्तन इतना प्रभावी है, तो अवैध शराब का कारोबार इतनी बड़ी मात्रा में फल-फूल कैसे रहा है?

अप्रैल 2026 के आंकड़े भी इसी दिशा में इशारा करते हैं, जहां 9,535 नए मामले सामने आए और 2.55 लाख लीटर अवैध शराब बरामद की गई। 1,516 गिरफ्तारियां और मात्र 214 लोगों को जेल भेजा जाना इस बात को दर्शाता है कि कार्रवाई का असर सीमित ही रह जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्व बढ़ोतरी कहीं न कहीं शराब की खपत में वृद्धि और लाइसेंसिंग सिस्टम के विस्तार का परिणाम हो सकती है, जबकि अवैध कारोबार पर नियंत्रण के दावे कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं।

सरकार के लिए चुनौती केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि अवैध शराब के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है। जब तक इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते, तब तक ऐसे रिकॉर्ड केवल आंकड़ों का खेल बनकर रह जाएंगे।

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