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हज यात्रियों पर एक और वित्तीय बोझ: हज-2026 हवाई किराये की शेष राशि 13 जुलाई तक चुकाने का कड़ा फरमान

यात्रा खत्म, वसूली जारी: हज कमेटी ने थमाया अल्टीमेटम

(निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क):

हज-2026 की पवित्र यात्रा पूरी कर लौटे यात्रियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हज कमेटी ऑफ इंडिया ने अब एक नया कड़ा फरमान जारी करते हुए बचे हुए हवाई किराये की शेष धनराशि हर हाल में 13 जुलाई, 2026 तक जमा करने का अल्टीमेटम दिया है। वापसी उड़ानें समाप्त होने के बाद भी पैसे वसूलने की इस जल्दबाजी से कई हज यात्रियों में भारी असंतोष और वित्तीय तनाव का माहौल है।

मध्य पूर्व संकट के बहाने 10 हजार रुपये की अतिरिक्त चपत

उत्तर प्रदेश हज कमेटी के सचिव और कार्यपालक मोहम्मद तारिक द्वारा जारी सर्कुलर संख्या-42 (दिनांक 03 जुलाई, 2026) के अनुसार, यह पूरी कवायद पूर्व में जारी सर्कुलर-39 (दिनांक 28 अप्रैल, 2026) के सिलसिले में की जा रही है। तब अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार ने मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में उपजे संकट और असाधारण परिस्थितियों का हवाला देकर हवाई किराये में अचानक बढ़ोतरी कर दी थी। इस संशोधन के नाम पर प्रत्येक हज यात्री पर 10,000 रुपये (रुपए दस हजार) का अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल दिया गया था, जिसे जमा करने की आखिरी तारीख पहले 15 मई, 2026 तय की गई थी।

कार्रवाई की चेतावनी: बैंक खाते और रेफरेंस नंबर का चक्कर

हज कमेटी ने साफ किया है कि बड़ी संख्या में यात्रियों ने अभी तक इस बढ़ी हुई हवाई किराये की राशि का भुगतान नहीं किया है। अब सरकार और कमेटी ने बकाया वसूलने के लिए सख्त रुख अपना लिया है। निर्देशों के मुताबिक:डिफाल्टर यात्रियों को हर हाल में 13 जुलाई, 2026 तक पूरी बकाया राशि तय पे-इन-स्लिप के माध्यम से जमा करनी होगी। यह राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) या यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) में हज कमेटी ऑफ इंडिया के खाते में ही स्वीकार की जाएगी। यात्रियों को हज कमेटी की वेबसाइट (hajcommittee.gov.in) से अपना बैंक रेफरेंस नंबर ढूंढकर अनिवार्य रूप से दर्ज करना होगा, जिसके बिना भुगतान मान्य नहीं होगा।

पवित्र यात्रा से लौटे यात्रियों पर इस तरह अचानक और जबरन डाले गए इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ की चौतरफा आलोचना हो रही है।

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