खेती-किसानी

सूखे की मार और सरकार लाचार: यूपी में मानसून फेल, 56% कम बरसे बदरा

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

उत्तर प्रदेश के किसानों पर मौसम की सबसे क्रूर मार पड़ी है। मौसम विभाग के डराने वाले आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में अभी तक मानक से 56 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जिससे लगभग सभी जिले सूखे की कगार पर पहुंच गए हैं। अल-निनो के देशव्यापी प्रकोप और विषम मानसून ने खेती-किसानी की कमर तोड़ दी है। अब सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए कागजी एडवाइजरी जारी कर पल्ला झाड़ रही है।

धान की खेती पर संकट: कम पानी वाली प्रजातियों के भरोसे रहने की मजबूरी!

पानी की भारी किल्लत को देखते हुए कृषि विभाग ने साफ कह दिया है कि बिना सुनिश्चित सिंचाई वाले इलाकों में धान की खेती भूल जाएं। किसानों को धान के बजाय मोटे अनाज और दलहन उगाने की कड़वी सलाह दी गई है। संकट ऐसा है कि अब किसानों को कम दिनों में तैयार होने वाली सीआर धान और एनडीआर जैसी प्रजातियों तथा सीधी बुआई (डीएसआर) के भरोसे रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।

महँगी तकनीक और मजबूरी की मल्चिंग: पूसा हाइड्रो जेल के सहारे टिकी उम्मीदें!

सूखती मिट्टी और घटते भूजल स्तर के बीच किसानों को गहरी जुताई से बचने और खेतों में सूखी पत्तियां या महंगी प्लास्टिक शीट से मल्चिंग करने का अव्यावहारिक सुझाव दिया जा रहा है। पानी के अभाव में अब पूसा हाइड्रो जेल और कंपोस्ट खाद का अतिरिक्त खर्च किसानों के सिर मढ़ दिया गया है। सिंचाई के लिए केवल रात में जागने और ड्रिप-स्प्रिंकलर जैसी खर्चीली प्रणालियों को अपनाने की बात कहकर विभाग ने किसानों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।

31 जुलाई से पहले कराएं बीमा, वरना सब स्वाहा!

फसलों की बर्बादी को भांपते हुए सरकार ने किसानों को आगाह किया है कि किसी भी बड़ी तबाही से बचने के लिए 31 जुलाई से पहले खरीफ फसलों का बीमा हर हाल में करा लें। 2 प्रतिशत प्रीमियम की आड़ में किसानों को बीमा कंपनियों के भरोसे धकेल दिया गया है, क्योंकि मौसम के इस जानलेवा पैटर्न के आगे पूरी व्यवस्था पंगु नजर आ रही है।

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