चुनाव खत्म होते ही भाजपा को याद आया ‘संकट’: अखिलेश यादव का हमला
महंगाई, बेरोजगारी और अर्थव्यवस्था पर भाजपा घिरी : अखिलेश यादव

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
। Akhilesh Yadav ने चुनाव समाप्त होने के बाद केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और प्रतिबंध संबंधी अपीलों पर तीखा हमला बोला है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव खत्म होते ही भाजपा को देश में “संकट” दिखाई देने लगा है, जबकि असली संकट खुद भाजपा सरकार है।
अखिलेश यादव ने कहा कि यदि सरकार को इतनी सारी पाबंदियां और बचत संबंधी अपीलें जारी करनी पड़ रही हैं, तो यह भाजपा की आर्थिक नीतियों की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “पंच ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” का सपना दिखाने वाली सरकार अब जनता से खर्च कम करने और संसाधनों के सीमित उपयोग की बात कर रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है और भारतीय रुपया कमजोर स्थिति में पहुंच गया है। उनके अनुसार महंगाई, बेरोजगारी और बाजार की अनिश्चितता ने आम जनता की परेशानियां बढ़ा दी हैं। किसान, मजदूर, नौकरीपेशा वर्ग, व्यापारी और युवा सभी आर्थिक दबाव झेल रहे हैं।
सोना खरीदने को लेकर जारी अपीलों पर भी अखिलेश यादव ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आम जनता पहले ही महंगाई से परेशान है और अधिकांश परिवार सोना खरीदने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने भाजपा नेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि काली कमाई को सोने में बदलने वाले लोगों पर रोक लगनी चाहिए, न कि आम नागरिकों को सलाह दी जानी चाहिए।
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने चुनावी खर्चों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि चुनाव के दौरान चार्टर विमानों, बड़े होटलों और प्रचार अभियानों पर भारी खर्च किया गया। यदि संसाधनों की बचत इतनी जरूरी थी, तो चुनाव प्रचार के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे विकल्पों का उपयोग क्यों नहीं किया गया।
अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विदेश नीति और घरेलू नीति दोनों मोर्चों पर विफल रही है। उन्होंने कहा कि देश की पारंपरिक गुटनिरपेक्ष नीति से हटकर कुछ विशेष समूहों के साथ खड़े होने का असर देश की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।
उन्होंने दावा किया कि जनता अब भाजपा की नीतियों से परेशान हो चुकी है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर दिखाई देगा। अखिलेश यादव ने कहा कि जनता महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।



