यूरोपीय संघ ने भारतीय समुद्री उत्पादों को दी बड़ी राहत, सितंबर 2026 के बाद भी जारी रहेगा निर्यात
ईयू बाजार में भारत की मजबूत वापसी, समुद्री खाद्य निर्यात में 41% से अधिक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
भारत के समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र को बड़ी अंतरराष्ट्रीय राहत मिली है। यूरोपीय संघ (EU) ने अपनी संशोधित मसौदा सूची में भारत को शामिल करते हुए सितंबर 2026 के बाद भी भारतीय मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि उत्पादों के निर्यात का रास्ता साफ कर दिया है। इससे भारतीय समुद्री उद्योग, विशेष रूप से झींगा निर्यात क्षेत्र को जबरदस्त मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
यूरोपीय आयोग द्वारा 12 मई 2026 को जारी संशोधित मसौदा सूची में भारत को उन देशों में शामिल किया गया है, जिन्हें यूरोपीय बाजार में पशु मूल के खाद्य उत्पादों के निरंतर निर्यात की अनुमति दी गई है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में जारी विनियमन में भारत का नाम सूची से बाहर होने के कारण निर्यातकों में चिंता बढ़ गई थी। अब नए संशोधन के बाद भारतीय समुद्री खाद्य उद्योग को बड़ी राहत मिली है।
वर्ष 2025-26 में यूरोपीय संघ भारत के लिए तीसरा सबसे बड़ा समुद्री खाद्य निर्यात बाजार बनकर उभरा है। इस दौरान भारत ने 1.593 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के समुद्री उत्पाद यूरोपीय देशों को निर्यात किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 41.45 प्रतिशत अधिक है। निर्यात मात्रा में भी लगभग 38.29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसमें फार्म में पाली गई झींगा मछलियों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही।
इस उपलब्धि के पीछे समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA), निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) और वाणिज्य विभाग के लगातार प्रयासों को अहम माना जा रहा है। भारत ने यूरोपीय संघ के कड़े खाद्य सुरक्षा मानकों और रोगाणुरोधी दवाओं के उपयोग से जुड़े नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया है।
राष्ट्रीय अवशेष नियंत्रण कार्यक्रम (NRCP) के तहत एंटीबायोटिक परीक्षण, निगरानी प्रणाली, ट्रेसबिलिटी और गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की वैश्विक खाद्य सुरक्षा छवि और मजबूत होगी तथा समुद्री क्षेत्र में रोजगार और विदेशी मुद्रा आय में भी वृद्धि होगी।



