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भारत बना ग्लोबल हेल्थ हब: 5 लाख से ज्यादा विदेशी मरीजों का भरोसा, मेडिकल टूरिज्म में तेज़ उछाल

बांग्लादेश से लेकर अफ्रीका तक मरीजों की पहली पसंद भारत, सस्ता इलाज और आयुष ने बढ़ाया आकर्षण

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बांग्लादेश से लेकर अफ्रीका तक मरीजों की पहली पसंद भारत, सस्ता इलाज और आयुष ने बढ़ाया आकर्षण


निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |

भारत तेजी से दुनिया के प्रमुख मेडिकल वैल्यू ट्रैवल (MVT) हब के रूप में उभर रहा है। वर्ष 2025 के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 5,07,244 विदेशी नागरिक केवल चिकित्सा उपचार के लिए भारत पहुंचे, जो इस क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। कुल विदेशी पर्यटक आगमन (FTA) में चिकित्सा पर्यटन की हिस्सेदारी अब लगभग 5.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो इस सेक्टर की मजबूत पकड़ और संभावनाओं का संकेत देती है।

भारत की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण है—कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाला इलाज, आधुनिक अस्पतालों की उपलब्धता और आयुष जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों का अनूठा संयोजन। विकसित देशों में महंगे इलाज और लंबी वेटिंग लिस्ट से परेशान मरीज अब भारत को एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

अगर स्रोत देशों की बात करें तो बांग्लादेश सबसे आगे है, जहां से 3,25,127 मरीज भारत आए। इसके बाद इराक (30,989), उज्बेकिस्तान (13,699), सोमालिया (11,506), तुर्कमेनिस्तान (10,231), ओमान (9,738) और केन्या (9,357) जैसे देशों के मरीजों ने भारत में इलाज को प्राथमिकता दी। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि एशिया और अफ्रीका के देशों में भारत की चिकित्सा सेवाओं पर गहरा भरोसा बन चुका है।

भारत में हृदय सर्जरी, कैंसर उपचार, आर्थोपेडिक प्रक्रियाएं, अंग प्रत्यारोपण और न्यूरोलॉजिकल इलाज जैसी जटिल चिकित्सा सेवाएं विश्वस्तरीय मानकों के साथ उपलब्ध हैं। इसके अलावा, आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और अन्य आयुष पद्धतियां भी विदेशी मरीजों को आकर्षित कर रही हैं, जिससे भारत एक समग्र स्वास्थ्य गंतव्य के रूप में स्थापित हो रहा है।

सरकार की “Heal in India” पहल, ई-मेडिकल वीजा, और आयुष वीजा जैसी सुविधाएं इस सेक्टर को और मजबूत बना रही हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और वन-स्टॉप मेडिकल पोर्टल के जरिए विदेशी मरीजों को इलाज की पूरी प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बनाई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार बनी रही, तो 2030 तक भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार 16 बिलियन डॉलर से अधिक का हो सकता है। ऐसे में भारत न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बनेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भी अपनी मजबूत हिस्सेदारी दर्ज करेगा।

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