आलमबाग हादसे से भी नहीं लिया सबक! डीएलएफ माय पैड में नियमों को ताक पर रखकर लग रही अवैध लिफ्ट
'माय पैड' आरडब्ल्यूए और डीएलएफ सेल्स टीम की जुगलबंदी, बिना एलडीए व फायर एनओसी के दांव पर लगी सैकड़ों जानें

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
लखनऊ के आलमबाग क्षेत्र में कुछ पहले ‘ रंगीला’ रेस्टोरेंट में बिना अप्रूवल और एनओसी के लगाई गई स्टील फ्रेम लिफ्ट के फेल होने से दो लोगों की जान चली गई थी। इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन ने उस बिल्डिंग को सील कर दिया था। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस बड़े हादसे से सबक लेने के बजाय विभूति खंड, गोमती नगर स्थित ‘डीएलएफ माय पैड’ (DLF My Pad) में भी कुछ ऐसा ही जानलेवा खेल खेला जा रहा है।
माय पैड के बी-वन (B1) टावर में स्थित रेस्टोरेंट फ्लोर के एक हिस्से को डीएलएफ सेल्स टीम ने बेचा है। इसके बाद सेल्स टीम ने नियमों के विरुद्ध जाकर वहां एक अवैध लिफ्ट लगाने की परमिशन भी दे दी है। इस पूरे मामले में माय पैड रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के अध्यक्ष अशोक भाटिया, उपाध्यक्ष पंकज मित्तल, सचिव श्रीमती सुनीता और कोषाध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अपार्टमेंट एक्ट के मुताबिक, बिल्डिंग में किसी भी तरह का ढांचागत बदलाव करने के लिए जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) बुलाई जाती है, जिसमें सभी स्टेकहोल्डर्स की लिखित सहमति अनिवार्य होती है। लेकिन यहाँ नियमों की धज्जियां उड़ाकर तथाकथित रूप से सहमति दे दी गई।

इस अवैध निर्माण को लेकर डीएलएफ की प्रोजेक्ट टीम भी अंधेरे में है और उसे नहीं पता कि यह कैसे बन रहा है, जबकि सेल्स टीम ने इसे हरी झंडी दे दी है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इस खतरनाक कंस्ट्रक्शन के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), फायर ब्रिगेड और अन्य सुरक्षा एजेंसियों से एनओसी (NOC) कैसे मिली? या फिर बिना किसी अप्रूवल के ही इस अवैध लिफ्ट को धड़ल्ले से बनाया जा रहा है। स्थानीय निवासियों में डर का माहौल है कि यहाँ भी आलमबाग जैसा कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिससे जान-माल के साथ-साथ पूरी सोसाइटी की प्रतिष्ठा मटियामेट हो जाएगी। प्रशासन को इस पर तुरंत ऐक्शन लेना चाहिए।



