लखनऊ के ऐतिहासिक झंडे वाले पार्क में सजा 77वां जश्न-ए-मीलादुन्नबी,
ऑल इंडिया नातिया मुशायरे में गूंजे मोहब्बत और अमन के पैगाम

निश्चय टाइम्स डेस्क |
राजधानी के ऐतिहासिक झंडे वाले पार्क, अमीनाबाद में मरकज़ी मीलादुन्नबी कमेटी (रजि.) के तत्वावधान में 77वें भव्य जश्न-ए-मीलादुन्नबी और अखिल भारतीय नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। पैग़ंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन के मुबारक उपलक्ष्य में हुए इस रात भर चलने वाले रूहानी कार्यक्रम ने शहर के माहौल को पूरी तरह से मुकद्दस और गुलजार कर दिया। कार्यक्रम की सदारत वरिष्ठ शैक्षिक एवं राजनीतिक विद्वान आईपीएस मंजूर अहमद ने की, जबकि मंच का कुशल संचालन कमेटी के मीडिया इंचार्ज व वरिष्ठ पत्रकार खान मोहम्मद अब्दुल्लाह ने बखूबी निभाया।
अमन और इंसानियत का पैगाम
समारोह का औपचारिक उद्घाटन नदवा कॉलेज के प्रबंधक मौलाना बिलाल अब्दुल हई हसनी नदवी ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आज पूरी दुनिया में इस्लाम के पैगाम-ए-अमन (शांति और भाईचारे) को घर-घर तक पहुंचाने की सबसे अधिक आवश्यकता है। कार्यक्रम की शुरुआत कारी सुमामा इरफानी द्वारा कुरान पाक की तिलावत से हुई, जिसका उर्दू तर्जुमा मौलाना जहांगीर आलम कासमी ने पेश किया। कमेटी के जनरल सेक्रेटरी एम.ए. हसीब एडवोकेट ने अपने स्वागत भाषण में जश्न के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए समाज की कुरीतियों को मिटाने के लिए धर्मगुरुओं और कौमी लीडरों से आगे आने का आह्वान किया।
नातिया मुशायरे में शायरों ने बांधा समां
मध्य रात्रि के पश्चात शुरू हुए अखिल भारतीय नातिया मुशायरे में देश के कोने-कोने से पधारे नामचीन शायरों ने बारगाह-ए-नबी में खूबसूरत कलाम पेश किए। डॉक्टर शमीम रामपुरी, रफीक नागौरी (उज्जैन), कलीम नईमी (कानपुर), आसिफ आजमी (मऊ), साहिल आरफी, शमशेर आलम (बिहार), कमर सीतापुरी और अकील गाजीपुरी समेत तमाम शायरों ने अपने दिलकश और असरदार शेरों से श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।
“खुदा की याद से ग़ाफ़िल पड़े हुए थे जो लोग, खुदा से उनको मिलाने मेरे हुजूर आए” — रफीक नागौरी
कार्यक्रम के अंत में खान मोहम्मद अमानुल्लाह द्वारा कलाम-ए-विलादत, सलाम और दुआ के साथ इस ऐतिहासिक और भव्य आयोजन का समापन किया गया। इस दौरान पूर्व डीजीपी रिजवान अहमद सहित तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहे।


