उत्तर प्रदेश

‘भारत जीआई’ से स्थानीय हुनर को मिलेगा वैश्विक बाजार

एमएसएमई और डीपीआईआईटी की नई साझेदारी, ओएनडीसी-जीईएम पर पहुंचेगी देश की क्षेत्रीय पहचान

जीआई उत्पादों को नई उड़ान

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |

। भारत की पारंपरिक कला, शिल्प और क्षेत्रीय उत्पादों को देश-दुनिया के बड़े बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने भारतीय भौगोलिक संकेत यानी जीआई उत्पादों के व्यावसायीकरण, गुणवत्ता मानकीकरण और बाजार विस्तार के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

5 अगस्त को हुआ एमओयू

5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित वाणिज्य भवन में हुए समझौते पर एमएसएमई मंत्रालय के निदेशक मोहम्मद सालिक परवेज और डीपीआईआईटी के आईपीआर प्रभाग के निदेशक करण थापर ने हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम में दोनों विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

‘भारत जीआई’ बनेगा पहचान

इस साझेदारी की सबसे महत्वपूर्ण पहल ‘भारत जीआई’ बैनर है। इसके तहत क्षेत्रीय जीआई समूहों और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को डिजिटल वाणिज्य के ओएनडीसी तथा सरकारी ई-मार्केटप्लेस जीईएम से जोड़ने में सहयोग किया जाएगा। इससे स्थानीय उत्पादकों को डिजिटल बाजार में सीधे पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा।

कारीगरों को बाजार, हुनर को पहचान

सरकार का उद्देश्य केवल जीआई उत्पादों को कानूनी संरक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत उद्यमों में बदलना है। साझेदारी के तहत कारीगरों, बुनकरों और उत्पादक समूहों के लिए क्षमता निर्माण, डिजिटल सशक्तिकरण और बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर जोर रहेगा।

ओडीओपी को भी मिलेगा बल

एमएसएमई और डीपीआईआईटी अपने कार्यक्रमों में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) को भी एकीकृत करने की दिशा में काम करेंगे। इससे स्थानीय उत्पादों को संगठित बाजार, बेहतर ब्रांडिंग और व्यावसायिक अवसर उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।

वैश्विक बाजार पर नजर

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों, खरीदार-विक्रेता बैठकों तथा प्रदर्शनियों में समर्पित जीआई पवेलियन को सह-प्रायोजित करने की योजना भी साझेदारी का हिस्सा है। इससे भारतीय जीआई उत्पादों को घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने का रास्ता मजबूत होगा।

लोकल से ग्लोबल की ओर

डीपीआईआईटी जीआई के पंजीकरण और कानूनी संरक्षण से जुड़ा नोडल विभाग है, जबकि एमएसएमई मंत्रालय कारीगरों, पारंपरिक उद्योगों और छोटे उद्यमों के विकास पर केंद्रित है। दोनों की संयुक्त पहल से ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अवधारणा को आर्थिक आधार मिलने की उम्मीद है।

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