मुख्य निर्वाचन आयुक्त का मीडिया संवाद बना औपचारिकता?
सवालों के जवाब के बजाय ‘धन्यवाद’ और विदाई

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद को लेकर निराशा की तस्वीर सामने आई। मतदाता साक्षरता क्लब (ELC), ECINET पोर्टल, बूथ लेवल अधिकारियों की भूमिका और चुनावी व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद की उम्मीद थी, लेकिन कार्यक्रम को लेकर मौजूद पत्रकारों के बीच यह चर्चा रही कि संवाद अपने उद्देश्य तक पहुंचने के बजाय महज औपचारिकता बनकर रह गया।
मीडिया प्रतिनिधियों को उम्मीद थी कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त चुनावी व्यवस्था से जुड़े जमीनी सवालों, मतदाता सूची, BLO की जिम्मेदारियों, डिजिटल चुनावी सेवाओं और मतदाताओं की शिकायतों जैसे मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। लेकिन कार्यक्रम का स्वरूप ऐसा रहा कि सवालों और जवाबों की अपेक्षित प्रक्रिया के बजाय धन्यवाद के साथ संवाद का समापन होता दिखाई दिया।
ऐसे समय में जब चुनावी व्यवस्था में तकनीक और पारदर्शिता को लेकर लगातार बड़े दावे किए जा रहे हैं, मीडिया संवाद की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ECINET जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म की उपयोगिता, उसकी पहुंच और आम मतदाता के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों पर स्पष्ट जानकारी अपेक्षित थी। इसी तरह BLO की जिम्मेदारियों और उनके सामने मौजूद चुनौतियों पर भी खुलकर चर्चा की जरूरत महसूस की गई।
मीडिया संवाद लोकतंत्र में केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि सवाल पूछने और जवाब मांगने का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। ऐसे में यदि संवाद का अवसर उपलब्ध होने के बावजूद गंभीर प्रश्नों पर चर्चा न हो पाए, तो स्वाभाविक रूप से उसकी सार्थकता पर सवाल उठते हैं।
कार्यक्रम के बाद यह सवाल भी चर्चा में रहा कि यदि मीडिया प्रतिनिधियों को चुनावी व्यवस्था के महत्वपूर्ण विषयों पर सीधे सवाल रखने और जवाब पाने का पर्याप्त अवसर ही नहीं मिला, तो फिर इस आयोजन को संवाद की संपूर्ण प्रक्रिया कैसे माना जाए?
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के दौरे से पारदर्शिता और जवाबदेही पर स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद थी। लेकिन कार्यक्रम के अनुभव ने ‘संवाद के नाम पर संवादहीनता’ की बहस को जन्म दे दिया। अब जरूरत इस बात की है कि चुनाव आयोग मीडिया और जनता के कठिन सवालों का खुलकर सामना करे, क्योंकि लोकतंत्र में भरोसा केवल घोषणाओं से नहीं, स्पष्ट जवाब और पारदर्शी संवाद से बनता है।



