शिक्षा

दिव्यांगों के लिए डिस्टैंस लर्निंग और विशेष कोटा, शकुन्तला विवि ने खोले अवसरों के नए द्वार

वाराणसी में खुलेगा पहला सेंटर, रिसर्च को बढ़ावा और इंटरनेशनल स्टूडेंट्स के लिए नए नियम मंजूर

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |

लखनऊ स्थित डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय की 40वीं विद्या परिषद की बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी, जो छात्रों खासकर दिव्यांगजनों के लिए नई उम्मीदें लेकर आए हैं। विश्वविद्यालय ने शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दिव्यांग छात्रों के लिए डिस्टैंस लर्निंग (ओपन एंड डिस्टैंस एजुकेशन) के माध्यम से कौशल विकास पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। इससे अब ऐसे छात्र भी घर बैठे पढ़ाई और रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग प्राप्त कर सकेंगे, जो किसी कारणवश नियमित कक्षाओं में उपस्थित नहीं हो पाते।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने शोधार्थियों को बड़ी राहत देते हुए यह भी तय किया है कि अब पीएचडी मौखिकी परीक्षा पूर्ण होने की तिथि से ही उपाधि प्रदान की जाएगी, जिससे छात्रों को अनावश्यक देरी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही यूजी, पीजी और पीएचडी के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए आर्थिक सहायता देने का भी फैसला लिया गया है। पीएचडी छात्रों को 20,000 रुपये और अंतिम वर्ष के यूजी-पीजी (ऑनर्स विद रिसर्च) विद्यार्थियों को 10,000 रुपये तक की मदद दी जाएगी।

शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए विश्वविद्यालय ने स्टूडेंट फीडबैक को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है, जिससे शिक्षण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके। इसके अलावा कर्मचारियों के बच्चों के लिए 10 प्रतिशत सुपरन्यूमेरेरी सीट, खिलाड़ियों के लिए 5 प्रतिशत स्पोर्ट्स कोटा और स्वतंत्रता सेनानी आश्रितों के लिए 2 प्रतिशत आरक्षण जारी रखने का भी निर्णय लिया गया है।

कुलपति आचार्य संजय सिंह की पहल पर विश्वविद्यालय वाराणसी में अपना पहला क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र खोलने जा रहा है, जिसे विद्या परिषद की मंजूरी मिल चुकी है। यह केंद्र खुशीपुर स्थित अमरावती पुरुषोत्तम राजकीय बहुद्देशीय दिव्यांगजन विकास संस्थान में स्थापित किया जाएगा। सत्र 2026-27 से यहां स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम, बीवीए और चार वर्षीय बीए (एनईपी) शुरू होने की संभावना है। इस कदम से पूर्वांचल के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वविद्यालय की पहचान मजबूत करने के लिए इंटरनेशनल स्टूडेंट्स एडमिशन रूल्स एंड प्रोसीजर को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत इंटरनेशनल स्टूडेंट सेल विदेशी छात्रों को प्रवेश से लेकर पढ़ाई तक हर स्तर पर सहायता प्रदान करेगा।

कुलपति आचार्य संजय सिंह ने कहा कि ये सभी निर्णय विद्यार्थियों, विशेषकर दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। विश्वविद्यालय का लक्ष्य आधुनिक, समावेशी और वैश्विक स्तर की शिक्षा प्रणाली विकसित करना है, जिससे हर वर्ग के छात्रों को समान अवसर मिल सके।

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