आरबीआई का बड़ा फैसला—छोटे NBFCs को राहत, नई श्रेणी ‘Type I’ लागू

1 जुलाई 2026 से लागू होंगे नए नियम—₹1000 करोड़ से कम NBFC को डीरजिस्ट्रेशन का विकल्प
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क ।
वित्तीय क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों) के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जो 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे। इन संशोधनों के तहत NBFCs के नियामकीय ढांचे को और स्पष्ट, सरल और जोखिम-आधारित बनाने का प्रयास किया गया है।
सबसे अहम बदलाव ‘Type I NBFC’ की नई श्रेणी का है, जिसमें ऐसे NBFC शामिल होंगे जो न तो सार्वजनिक फंड लेते हैं और न ही उनका कोई कस्टमर इंटरफेस होता है। इस श्रेणी को अपेक्षाकृत कम नियामकीय बोझ के साथ संचालित करने की अनुमति दी गई है।
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि जिन NBFCs का एसेट साइज ₹1000 करोड़ से कम है और जो सार्वजनिक फंड का उपयोग नहीं करते, वे डीरजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें 31 दिसंबर 2026 तक आवेदन करना होगा। इस कदम को छोटे और कम जोखिम वाले NBFCs को राहत देने की दिशा में बड़ा निर्णय माना जा रहा है।
नए नियमों के अनुसार, NBFCs को अपने वित्तीय विवरणों में यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि वे सार्वजनिक फंड का उपयोग नहीं कर रहे हैं और उनका कोई ग्राहक इंटरफेस नहीं है। इसके अलावा, उनके स्टैच्यूटरी ऑडिटर्स को भी किसी प्रकार के उल्लंघन की स्थिति में आरबीआई को रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा।
आरबीआई ने ‘Type II NBFC’ की श्रेणी भी परिभाषित की है, जिसमें वे सभी NBFC शामिल होंगे जो सार्वजनिक फंड लेते हैं या जिनका ग्राहक इंटरफेस है। ऐसे NBFCs पर सख्त नियामकीय नियम लागू रहेंगे।
एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि यदि किसी ‘Unregistered Type I NBFC’ का कुल एसेट साइज समूह स्तर पर ₹1000 करोड़ या उससे अधिक हो जाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा।
इसके अलावा, यदि कोई NBFC भविष्य में सार्वजनिक फंड लेने या ग्राहक इंटरफेस विकसित करने का इरादा रखता है, तो उसे ‘Type II NBFC’ के रूप में पंजीकरण कराना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन NBFC सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने, अनुपालन लागत कम करने और जोखिम आधारित निगरानी को मजबूत करने में मदद करेगा। हालांकि, आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह निर्णय वित्तीय प्रणाली को अधिक सुरक्षित, संतुलित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे NBFC सेक्टर में स्थिरता और विश्वास बढ़ेगा।



