रिकॉर्ड मतदान पर सवाल—डेटा अधूरा, पारदर्शिता पर उठे गंभीर प्रश्न
91% से अधिक वोटिंग का दावा, लेकिन हजारों बूथों का आंकड़ा अभी बाकी

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में रिकॉर्ड मतदान का दावा किया गया है, लेकिन इसके साथ ही कई गंभीर सवाल भी खड़े हो गए हैं। भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार, दूसरे चरण में 91.66% मतदान दर्ज किया गया, जबकि पहले चरण में यह आंकड़ा 93.19% रहा था। दोनों चरणों को मिलाकर कुल मतदान प्रतिशत 92.47% बताया गया है, जो राज्य के इतिहास में सबसे अधिक माना जा रहा है।
हालांकि, यह आंकड़ा अभी अनंतिम है और इसमें हजारों मतदान केंद्रों का डेटा शामिल नहीं है। करीब 5,343 मतदान केंद्रों के आंकड़े अभी अपडेट नहीं हो पाए हैं, जिससे इस रिकॉर्ड मतदान की सटीकता पर सवाल उठ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर मतदान का दावा तभी विश्वसनीय माना जा सकता है, जब सभी बूथों का अंतिम और सत्यापित डेटा सामने आए। वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस उच्च मतदान प्रतिशत को लेकर पारदर्शिता की मांग की है।
चुनाव आयोग के अनुसार, पुरुषों का मतदान प्रतिशत 91.07%, महिलाओं का 92.28% और तीसरे लिंग का 91.28% रहा। हालांकि, यह आंकड़े भी अंतिम नहीं हैं और इनमें डाक मतपत्र तथा सेवा मतदाताओं का डेटा शामिल नहीं है।
मतदान प्रक्रिया की निगरानी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य आयुक्तों द्वारा लाइव वेबकास्टिंग के माध्यम से की गई। सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई थी, लेकिन इसके बावजूद डेटा अपडेट में देरी ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग ने मतदाताओं के लिए कई सुविधाएं लागू की थीं, जैसे रंगीन फोटो वाले बैलेट पेपर, मोबाइल जमा सुविधा और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष इंतजाम। बावजूद इसके, डेटा की अधूरी स्थिति और रिकॉर्ड दावों के बीच विरोधाभास ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है।



