यूपी गन्ना विभाग का बड़ा डिजिटल धमाका: ऑडिट मॉड्यूल से रुकेगी वित्तीय हेराफेरी, सीए संभालेंगे कमान!

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से एक नए डिजिटल युग की शुरुआत हो चुकी है। चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने गन्ना समितियों और विकास परिषदों के वित्तीय लेन-देन में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए एक अत्याधुनिक ‘ऑनलाइन ऑडिट मॉड्यूल’ विकसित किया है। अब समितियों के पाई-पाई का हिसाब सीधे डिजिटल निगरानी में होगा।
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) को मिला विशेष प्रशिक्षण; ऑनलाइन दर्ज होगी चेकलिस्ट
गन्ना आयुक्त के अनुसार, इस नई पारदर्शी व्यवस्था को लागू करने के लिए नामित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) को विस्तृत तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कोई भी सीए जब किसी समिति या परिषद का भौतिक निरीक्षण और लेखा-परीक्षण (Audit) करेगा, तो उसे अपनी रिपोर्ट, टिप्पणियां, फोटो और जियो-टैगिंग (Geo-Tagging) सीधे इसी ऑनलाइन मॉड्यूल पर अपलोड करनी होगी। इससे न केवल अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि वित्तीय अनुशासन भी मजबूत होगा।
20 जुलाई से चलेगा महा-सत्यापन अभियान; ‘स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल’ का होगा मिलान
विभाग ने जमीनी स्तर पर विसंगतियों को दूर करने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया है:
- अभियान की अवधि: 20 जुलाई से 30 अगस्त 2026 तक प्रदेश व्यापी अभियान चलाया जाएगा।
- सत्यापन का आधार: ‘स्मार्ट गन्ना किसान पोर्टल’ पर दर्ज गन्ना क्षेत्रफल और कल्टीवेबल लैंड एरिया (CLA) का मिलान सीधे भू-राजस्व (राजस्व अभिलेखों) के आंकड़ों से किया जाएगा।
- विशेष निगरानी: पिछले साल जिन गन्ना क्षेत्रों से रकबे या सट्टे को लेकर सबसे अधिक शिकायतें मिली थीं, वहां विभाग विशेष सॉफ्टवेयर के जरिए कड़ी निगरानी और शत-प्रतिशत भौतिक सत्यापन कराएगा।
जन प्रतिनिधियों का मिलेगा सहयोग; जिला स्तर पर जारी होगा सर्टिफिकेट
प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए इस अभियान में गन्ना विकास समितियों के अध्यक्षों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों का भी सक्रिय सहयोग लिया जाएगा। अभियान के सफल समापन के बाद, जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा काम की प्रमाणिकता की जांच कर बकायदा एक प्रमाण-पत्र (Certificate) भी जारी किया जाएगा, जिससे किसी भी स्तर पर धांधली की गुंजाइश न बचे।



