यूनानी विभाग में ‘मठाधीशों’ का राज? जीरो टॉलरेंस नीति पर उठे बड़े सवाल
जीरो टॉलरेंस नीति पर सवाल! यूनानी विभाग में 30 साल पुराने नेटवर्क पर भ्रष्टाचार और संरक्षण के गंभीर आरोप

CM से लोकार्पण के बाद भी बंद पड़ा यूनानी कॉलेज, विभाग पर ‘सिस्टमेटिक साजिश’ के आरोप
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
Dr. Shakeel Ahmad ने आयुष मंत्री को भेजे गए अपने विस्तृत ज्ञापन में बरेली स्थित 129.50 करोड़ रुपये की लागत से बने 100 बेड वाले राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को “प्रशासनिक विफलता का जीवंत प्रतीक” बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री स्तर पर शिलान्यास और लोकार्पण होने के बावजूद आज तक न मेडिकल कॉलेज शुरू हुआ, न अस्पताल संचालित हुआ और न ही ओपीडी चालू की गई।
ज्ञापन में कहा गया है कि यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि यूनानी विभाग के भीतर बैठे अधिकारियों और कर्मचारियों के गठजोड़ की सुनियोजित साजिश है, जो मोदी-योगी सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति को खुली चुनौती दे रही है। आरोप है कि विभाग में वर्षों से जमे कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों ने ऐसा “पावर नेटवर्क” बना लिया है, जो स्थानांतरण नीति, प्रशासनिक आदेशों और जवाबदेही की व्यवस्था को ठेंगा दिखा रहा है।
डॉ. शकील अहमद ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि विभाग में लगभग 30 वर्षों से एक ही सीट पर जमे कर्मचारी मोहम्मद इकबाल ने कथित रूप से विभागीय मठाधीशों के साथ मिलकर ऐसा प्रभाव तंत्र खड़ा कर लिया है, जिससे ईमानदार प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। आरोप है कि यही नेटवर्क महत्वपूर्ण फाइलों को दबाने, निर्णयों को लंबित रखने और सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
ज्ञापन में यह भी दावा किया गया कि विधानसभा में उठे सवालों पर विभागीय चुप्पी कोई संयोग नहीं बल्कि सरकार को असहज करने की रणनीति का हिस्सा है। शोध परियोजनाओं के नाम पर लगभग 11 लाख 65 हजार रुपये की कथित अनियमितताओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब भवन निर्माण पूरा हो चुका था, विभाग को हैंडओवर मिल चुका था और मुख्यमंत्री द्वारा लोकार्पण भी किया जा चुका था, तो आखिर कॉलेज और अस्पताल को शुरू क्यों नहीं किया गया? आरोप है कि जानबूझकर संस्थान को निष्क्रिय रखा गया ताकि बाद में भवन को दूसरे विभाग को हस्तांतरित करने का रास्ता तैयार किया जा सके।
अब यूनानी बिरादरी और सामाजिक संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। मांग उठ रही है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।



