पीएलआई योजना में उत्तर प्रदेश का निराशाजनक प्रदर्शन: 15 कंपनियों को मंजूरी के बावजूद शून्य रोजगार,

औद्योगिक नीति की पोल खोलते केंद्र सरकार के आंकड़े
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |
उत्तर प्रदेश को देश का विनिर्माण हब बनाने और औद्योगिक विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों ने राज्य सरकार की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। वस्त्र क्षेत्र के लिए केंद्र सरकार की बहुचर्चित ‘उत्पादन संबद्ध प्रोत्साहन’ (PLI) योजना के तहत उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक और चिंताजनक रहा है। संसद में पेश आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक राज्य में स्वीकृत 15 कंपनियों के माध्यम से नाममात्र का निवेश आया है, जबकि रोजगार सृजन के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश का खाता भी नहीं खुल सका है।
33 हजार से अधिक नौकरियों में यूपी का हिस्सा ‘शून्य’: युवाओं के भविष्य पर प्रश्नचिह्न केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री श्री पवित्र मार्गेरिटा द्वारा लोकसभा में दी गई लिखित जानकारी के अनुसार, देशभर में पीएलआई योजना के तहत कुल 33,427 नए प्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि देश की सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में इस योजना से एक भी नया रोजगार सृजित नहीं हुआ है। तमिलनाडु (7,930), कर्नाटक (5,611), मध्य प्रदेश (4,970) और गुजरात (4,493) जैसे राज्य जहां हजारों नौकरियां पैदा कर रहे हैं, वहीं उत्तर प्रदेश का ‘शून्य’ का आंकड़ा राज्य की रोजगार नीतियों और औद्योगिक क्रियान्वयन की विफलता को दर्शाता है।
8,117 करोड़ के कुल राष्ट्रीय निवेश में यूपी को मिली केवल 4.63 करोड़ की तिनका-बराबर हिस्सेदारी निवेश के मोर्चे पर भी उत्तर प्रदेश की स्थिति बेहद चिंताजनक है। देशभर में कंपनियों द्वारा किए गए कुल ₹8,117.64 करोड़ के वास्तविक निवेश में से उत्तर प्रदेश के हिस्से केवल ₹4.63 करोड़ (मात्र 0.05%) ही आए हैं। 15 स्वीकृत कंपनियां होने के बावजूद इतना कम निवेश यह दर्शाता है कि राज्य में औद्योगिक इकाइयों को धरातल पर उतारने में नौकरशाही की सुस्ती और नीतिगत बाधाएं आड़े आ रही हैं।
गुजरात और दक्षिण के राज्यों से मीलों पीछे छूटा उत्तर प्रदेश तुलनात्मक रूप से देखें तो गुजरात ने ₹1,903 करोड़, कर्नाटक ने ₹1,515 करोड़, गोवा ने ₹1,355 करोड़ और तमिलनाडु ने ₹1,277 करोड़ का भारी-भरकम निवेश आकर्षित किया है। यहां तक कि बिहार ($237 करोड़ निवेश, 3,465 रोजगार) और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने भी यूपी से कई गुना बेहतर प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश में निवेश का न आना और रोजगार का ठप रहना राज्य के वित्तीय समावेशन और औद्योगिक दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।



