
ट्रैकचाइल्ड, खोया-पाया और GHAR पोर्टल एक मंच पर
बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए सरकार का बड़ा डिजिटल कदम
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत एकीकृत मिशन वात्सल्य पोर्टल विकसित किया है। इस नई डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से लापता, मिले हुए तथा संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, खोज, पुनर्वास और परिवार से पुनर्मिलन की प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी होगी।
सरकार ने ट्रैकचाइल्ड पोर्टल, खोया-पाया एप्लिकेशन तथा गो होम एंड री-यूनाइट (GHAR) पोर्टल को मिशन वात्सल्य पोर्टल से जोड़कर एक व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम तैयार किया है। इससे देशभर की विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान अब रियल टाइम में संभव हो सकेगा।
तकनीक से मजबूत होगा सुरक्षा कवच
मिशन वात्सल्य पोर्टल को गृह मंत्रालय के क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (CCTNS) से भी एकीकृत किया गया है। इससे राज्यों की पुलिस लापता बच्चों से संबंधित एफआईआर का स्वतः मिलान पोर्टल के डाटाबेस से कर सकेगी, जिससे बच्चों की तलाश में तेजी आने की उम्मीद है।
जनभागीदारी को मिला नया मंच
‘खोया-पाया’ मॉड्यूल के माध्यम से अब कोई भी नागरिक किसी लापता अथवा मिले हुए बच्चे की सूचना सीधे पोर्टल पर दर्ज करा सकेगा। इससे समाज की भागीदारी भी बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी।
राज्यों को दिए गए स्पष्ट निर्देश
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सभी राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में जिला एवं राज्य स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित कर दी है। साथ ही बाल कल्याण समितियों और किशोर न्याय बोर्डों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी मामलों की जानकारी समयबद्ध तरीके से पोर्टल पर अपडेट की जाए।
रियल टाइम निगरानी पर जोर
सरकार का उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में रह रहे बच्चों, विशेष रूप से लापता एवं संवेदनशील बच्चों, को शीघ्र संरक्षण, पुनर्वास और परिवार से पुनर्मिलन उपलब्ध कराना है। डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित यह प्रणाली बाल संरक्षण व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।



