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सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को बड़ी राहत: क्रेडिट गारंटी सीमा बढ़कर ₹10 करोड़, आरबीआई का बिना गारंटी ₹20 लाख तक ऋण का आदेश

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

देश के औद्योगिक ताने-बाने को सुदृढ़ करने तथा प्रथम पीढ़ी के उद्यमियों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में जानकारी दी कि सरकार ‘क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज’ (CGTMSE) के माध्यम से सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) को बिना किसी संपार्श्विक (Collateral) सुरक्षा या थर्ड-पार्टी गारंटी के ऋण उपलब्ध करा रही है।

गारंटी सीमा में दोगुना इजाफा और शुल्क में कटौती

देश में उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से क्रेडिट गारंटी योजना (CGS) के तहत अधिकतम ऋण गारंटी सीमा को 1 अप्रैल 2025 से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये से सीधे 10 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, उद्यमियों पर वित्तीय बोझ कम करने के लिए वार्षिक गारंटी शुल्क (AGF) की मानक दरों में 50% की भारी कटौती करते हुए इसे मात्र 0.37% प्रति वर्ष कर दिया गया है।

₹20 लाख तक के ऋण पर कोई संपार्श्विक सुरक्षा नहीं

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 9 फरवरी 2026 को जारी मुख्य निर्देशों के अनुसार, सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे MSME क्षेत्र की इकाइयों को 20 लाख रुपये तक के ऋण पर किसी भी प्रकार की संपार्श्विक सुरक्षा (Collateral) स्वीकार न करें।

विशेष श्रेणियों और पिछड़े क्षेत्रों पर ध्यान

महिला उद्यमियों, विशेष वर्ग और क्रेडिट अपुष्ट जिलों (ICDD) के लिए अतिरिक्त 5% गारंटी कवरेज तथा गारंटी शुल्क में 10% की विशेष छूट का प्रावधान किया गया है। वहीं तमिलनाडु में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने हेतु ‘तमिलनाडु क्रेडिट गारंटी योजना (TNCGS)’ शुरू की गई है।

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