उत्तराखण्ड

भारत और जापान ने 75 अरब डॉलर की द्विपक्षीय स्वैप व्यवस्था का किया नवीनीकरण

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क | डी एफ हिंदी

  1. भारत–जापान के बीच 75 अरब डॉलर की स्वैप व्यवस्था का नवीनीकरण, आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती
  2. वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत-जापान का बड़ा कदम, वित्तीय सुरक्षा जाल हुआ और मजबूत
  3. रिज़र्व बैंक और बैंक ऑफ जापान के बीच समझौता, क्षेत्रीय स्थिरता को मिलेगा बल
  4. द्विपक्षीय मुद्रा स्वैप व्यवस्था बरकरार, 28 फरवरी 2026 से लागू हुआ नवीनीकरण

भारत और जापान के बीच वित्तीय सहयोग को नई दिशा देते हुए द्विपक्षीय स्वैप व्यवस्था (Bilateral Swap Arrangement – BSA) का 28 फरवरी 2026 से औपचारिक नवीनीकरण कर दिया गया है। इस महत्वपूर्ण समझौते के तहत दोनों देश आवश्यकता पड़ने पर अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं को अमेरिकी डॉलर के बदले आपस में विनिमय कर सकेंगे। इस व्यवस्था की अधिकतम सीमा पूर्ववत 75 अरब अमेरिकी डॉलर ही रखी गई है।

इस नवीनीकरण के अंतर्गत तीसरे संशोधन एवं पुनर्स्थापन समझौते (Third Amendment and Restatement Agreement) पर Bank of Japan ने जापान के वित्त मंत्री के एजेंट के रूप में हस्ताक्षर किए, जबकि भारत की ओर से Reserve Bank of India ने इस समझौते को औपचारिक रूप दिया। यह प्रेस विज्ञप्ति 2025-2026/2195 के अंतर्गत जारी की गई।

क्या है द्विपक्षीय स्वैप व्यवस्था?

द्विपक्षीय स्वैप व्यवस्था एक ऐसी वित्तीय व्यवस्था है जिसके माध्यम से दो देश अपनी-अपनी मुद्राओं का विनिमय कर सकते हैं, विशेष रूप से तब जब किसी देश को विदेशी मुद्रा की तरलता की आवश्यकता हो। इस व्यवस्था के तहत भारत और जापान अपनी स्थानीय मुद्रा के बदले अमेरिकी डॉलर प्राप्त कर सकते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलती है।

यह प्रणाली किसी संभावित वित्तीय संकट, पूंजी के अचानक बहिर्गमन या विनिमय दर में असामान्य उतार-चढ़ाव की स्थिति में सुरक्षा कवच का कार्य करती है।

75 अरब डॉलर की सीमा क्यों महत्वपूर्ण?

75 अरब अमेरिकी डॉलर की सीमा इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच उच्च स्तर का विश्वास और वित्तीय सहयोग मौजूद है। यह राशि एशिया क्षेत्र की द्विपक्षीय स्वैप व्यवस्थाओं में से एक बड़ी व्यवस्था मानी जाती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देश वैश्विक वित्तीय बाजारों में संभावित अस्थिरता से निपटने के लिए तैयार हैं।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महत्व

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई, ऊर्जा संकट, आपूर्ति शृंखला व्यवधान और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियाँ सामने हैं। ऐसे समय में मजबूत द्विपक्षीय वित्तीय व्यवस्थाएं निवेशकों और बाजारों के लिए विश्वास का संदेश देती हैं।

भारत और जापान का यह कदम क्षेत्रीय और वैश्विक वित्तीय स्थिरता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

अन्य वित्तीय सुरक्षा तंत्रों को पूरक

दोनों देशों ने यह विश्वास व्यक्त किया है कि यह स्वैप व्यवस्था अन्य वित्तीय सुरक्षा तंत्रों को मजबूत और पूरक बनाने का कार्य करेगी। इसमें क्षेत्रीय व्यवस्थाएं और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थान शामिल हैं। यह व्यवस्था केवल आपातकालीन सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि बाजार में स्थिरता और भरोसा बनाए रखने का एक दीर्घकालिक उपाय भी है।

भारत-जापान आर्थिक संबंधों का विस्तार

पिछले वर्षों में भारत और जापान के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अवसंरचना विकास, उच्च गति रेल परियोजनाएं, विनिर्माण, डिजिटल प्रौद्योगिकी और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। स्वैप व्यवस्था का नवीनीकरण इस व्यापक सहयोग का वित्तीय स्तंभ है।

निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की व्यवस्थाएं विदेशी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत देती हैं। इससे यह संदेश जाता है कि दोनों देशों के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा समर्थन और तरलता उपलब्ध है, जिससे वे बाहरी आर्थिक झटकों का सामना करने में सक्षम हैं।

क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत और जापान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। दोनों देशों की मजबूत आर्थिक साझेदारी क्षेत्रीय वित्तीय स्थिरता और विकास को गति देती है। यह व्यवस्था एशियाई वित्तीय तंत्र को भी मजबूती प्रदान करती है।

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