ग्रो सेफ फूड अभियान’ कार्यक्रम में किसानों का फूटा गुस्सा, टिप्पणी पर जताया विरोध
किसान बताते कुछ और करते कुछ” बयान से मचा विवाद, गोष्ठी में हंगामे जैसे हालात

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |
लखनऊ के Indira Gandhi Pratishthan में आयोजित “राज्य स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी 2026” उस समय विवादों में घिर गई जब कृषक-वैज्ञानिक-अधिकारी संवाद सत्र के दौरान किसानों को लेकर की गई एक टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।
कार्यक्रम में “ग्रो सेफ फूड अभियान 2.0” का शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य प्रदेश में खरीफ फसलों की उत्पादकता बढ़ाना, सुरक्षित खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों का प्रसार करना बताया गया। इस अवसर पर कृषि उत्पादन आयुक्त Deepak Kumar, कृषि विभाग के अधिकारी रविंद्र सिंह, उद्यान विभाग, पशुधन विभाग, मत्स्य विभाग के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
हालांकि कार्यक्रम के दौरान माहौल उस वक्त तनावपूर्ण हो गया जब संवाद सत्र में कथित तौर पर यह कहा गया कि “किसान करते कुछ हैं और बताते कुछ हैं।” इस टिप्पणी को किसानों ने अपमानजनक बताते हुए तत्काल आपत्ति जताई। कई किसानों ने खुलकर नाराजगी व्यक्त की और कहा कि सरकार व अधिकारी यदि किसानों को ही संदेह की नजर से देखेंगे तो योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीन तक कैसे पहुंचेगा।
कार्यक्रम में मौजूद किसानों का कहना था कि खेती पहले से ही बढ़ती लागत, मौसम की मार और बाजार की अनिश्चितताओं से जूझ रही है। ऐसे में किसानों पर अविश्वास जताने वाली टिप्पणियां उनका मनोबल तोड़ती हैं। कुछ किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि संवाद के नाम पर किसानों की समस्याएं सुनने के बजाय उन्हें कटघरे में खड़ा किया जा रहा है।
गोष्ठी में आए कई किसानों ने कहा कि यदि कृषि सुधार और सुरक्षित खाद्य उत्पादन को लेकर सरकार गंभीर है तो किसानों को सम्मान और भरोसे के साथ जोड़ना होगा। उनका कहना था कि खेत में काम करने वाला किसान ही असली स्थिति जानता है, इसलिए उसकी बात को शक की नजर से नहीं बल्कि अनुभव के रूप में देखा जाना चाहिए।
हालांकि अधिकारियों की ओर से इस विवादित टिप्पणी पर कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई, लेकिन कार्यक्रम के दौरान किसानों की नाराजगी चर्चा का विषय बनी रही। किसानों ने भविष्य में ऐसे आयोजनों में संवेदनशील भाषा के इस्तेमाल की मांग की।




