भारत बना वैश्विक शिक्षा का केंद्र: स्टडी इन इंडिया कॉन्क्लेव 2026 में गूंजा आत्मविश्वास
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क | डी.एफ. हिंदी

🌍 50 से अधिक देशों के राजनयिकों को धर्मेंद्र प्रधान का आमंत्रण – भारत में करें अध्ययन, नवाचार और साझेदारी
📚 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से मजबूत हुई भारत की वैश्विक शैक्षणिक स्थिति
🚀 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने का खुला निमंत्रण
भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल ज्ञान का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक ज्ञान-व्यवस्था का निर्माता और मार्गदर्शक बनने की दिशा में अग्रसर है। इसी दृष्टि के साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित ‘स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित किया।
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों, राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधियों तथा शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। सम्मेलन का उद्देश्य भारत की तेजी से विकसित हो रही उच्च शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक साझेदारी को सशक्त बनाना था।
🌏 शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण की नई दिशा
अपने संबोधन में श्री प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नीति भारत की शिक्षा प्रणाली में ऐतिहासिक परिवर्तन लेकर आई है। उन्होंने कहा कि भारत शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण, गुणवत्ता सुधार, नवाचार और समावेशिता पर विशेष ध्यान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि आज भारत केवल डिग्री देने वाला देश नहीं, बल्कि अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
🇮🇳 2047 का विजन: विकसित भारत
श्री प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य शिक्षा, अनुसंधान और कौशल विकास के माध्यम से ही संभव होगा।
उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सीखने, अनुसंधान, नवाचार और उनके क्रियान्वयन के लिए अपार अवसर प्रदान करता है।
💡 भारत की ताकत: युवा शक्ति और ज्ञान परंपरा
शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसका जनसांख्यिकीय लाभांश, जीवंत ज्ञान परंपरा और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल के माध्यम से भारत अंतरराष्ट्रीय छात्रों, शोधकर्ताओं और संस्थानों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रहा है।
उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, सतत ऊर्जा और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में भारत की प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत विश्वसनीय नवाचार साझेदार के रूप में उभर रहा है।
🤝 शिक्षा – राष्ट्रों के बीच सबसे मजबूत सेतु
श्री प्रधान ने कहा कि अनिश्चित और तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में शिक्षा ही समाजों के बीच सबसे मजबूत सेतु है। भारत ज्ञान-आधारित साझेदारी के माध्यम से सहयोगी देशों के साथ स्थायी संबंध स्थापित करना चाहता है।
उन्होंने राजनयिकों से भारत की बहुविषयक, सुलभ और नवाचार-प्रेरित शिक्षा प्रणाली के साथ सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।
📖 उच्च शिक्षा सचिव की महत्वपूर्ण टिप्पणी
उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने पिछले छह वर्षों में भारत के उच्च शिक्षा सुधारों को स्पष्ट दिशा दी है।
उन्होंने बताया कि भारतीय विश्वविद्यालय संयुक्त डिग्री, द्विभाषी कार्यक्रमों और अनुसंधान साझेदारी के माध्यम से वैश्विक जुड़ाव को मजबूत कर रहे हैं।
🏛 विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए नया नियामक ढांचा
डॉ. जोशी ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए पारदर्शी और समयबद्ध नियामक ढांचा तैयार किया है।
इस पहल के अंतर्गत ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के प्रमुख संस्थानों के आवेदनों को एक माह के भीतर मंजूरी प्रदान की गई है।
यह कदम भारत को वैश्विक शिक्षा हब बनाने की दिशा में ऐतिहासिक माना जा रहा है।
🎓 सम्मेलन के प्रमुख सत्र
सम्मेलन में निम्न विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए—
- भारतीय ज्ञान प्रणाली को वैश्विक शैक्षणिक पेशकश के रूप में प्रस्तुत करना
- एसपीएआरसी और जीआईएएन के माध्यम से अकादमिक साझेदारी
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रौद्योगिकियां
- भारत में विदेशी विश्वविद्यालय परिसरों हेतु यूजीसी विनियम 2023
- अंतर्राष्ट्रीय शाखा परिसर एवं सहायक ढांचे
- भारत की कौशल संरचना का अंतर्राष्ट्रीयकरण
- भारत इनोवेट्स 2026
🌐 छात्र गतिशीलता और अनुसंधान सहयोग
कॉन्क्लेव के दौरान छात्र गतिशीलता, संयुक्त डिग्री कार्यक्रम, अनुसंधान साझेदारी तथा अंतरराष्ट्रीय परिसरों की स्थापना पर विस्तृत चर्चा हुई।
भागीदार देशों के छात्रों को भारत में उच्च शिक्षा और अल्पकालिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया। साथ ही विश्व स्तरीय विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित किया गया।
📊 भारत की वैश्विक शिक्षा में बढ़ती भूमिका
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बाद भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली अधिक लचीली, बहुविषयक और नवाचार-उन्मुख बनी है।
भारत में आज 1000 से अधिक विश्वविद्यालय, 40,000 से अधिक कॉलेज और करोड़ों छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। डिजिटल शिक्षा, कौशल आधारित पाठ्यक्रम और उद्योग-अकादमिक साझेदारी ने शिक्षा को नई दिशा दी है।



