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RBI का बड़ा एक्शन: नियम तोड़ने पर बैंक ऑफ इंडिया पर जुर्माना

छोटे खातों से वसूली, जमाकर्ताओं को नुकसान—गंभीर लापरवाही उजागर

नियामकीय चूक पर सवाल: ग्राहकों के भरोसे से खिलवाड़?

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क

भारतीय बैंकिंग व्यवस्था की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं, जब Reserve Bank of India (RBI) ने Bank of India पर ₹58.50 लाख का मौद्रिक जुर्माना ठोका है। यह कार्रवाई बैंक द्वारा ‘Priority Sector Lending (PSL)’ और ‘Interest Rate on Deposits’ से जुड़े निर्देशों के उल्लंघन के चलते की गई है।

RBI की जांच (ISE 2025) में सामने आया कि बैंक ने ₹25,000 तक के छोटे लोन खातों पर भी एड-हॉक सर्विस चार्ज, प्रोसेसिंग फीस और इंस्पेक्शन चार्ज वसूले। यह सीधे तौर पर गरीब और छोटे उधारकर्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने जैसा है। सवाल यह उठता है कि क्या बैंकिंग सिस्टम अब आम जनता के हितों के बजाय मुनाफे को प्राथमिकता दे रहा है?

इतना ही नहीं, बैंक ने कई टर्म डिपॉजिट (TDR) खातों में मैच्योरिटी के बाद से भुगतान तक के बीच का ब्याज भी नहीं दिया। यानी ग्राहकों के पैसे पर बैंक ने फायदा उठाया, जबकि जमाकर्ताओं को उनका हक नहीं मिला। यह लापरवाही नहीं, बल्कि भरोसे के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जा रहा है।

RBI ने स्पष्ट किया है कि यह जुर्माना केवल नियामकीय खामियों के आधार पर लगाया गया है, लेकिन इससे बैंक की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह जरूर खड़े होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को उजागर करती हैं।

हालांकि, RBI ने यह भी कहा कि यह कार्रवाई किसी ग्राहक-बैंक समझौते की वैधता पर निर्णय नहीं है, लेकिन इससे यह साफ है कि निगरानी तंत्र को और सख्त करने की जरूरत है।

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