पर्यटन विकास या घोषणाओं का सिलसिला? छोटे बजट में बड़े दावे पर सवाल
4.70 करोड़ की योजना से ‘वर्ल्ड क्लास’ सपना—क्या जमीन पर दिखेगा बदलाव?

महाभारत सर्किट में काम्पिल्य को चमकाने की कोशिश, लेकिन पिछली योजनाओं का क्या हुआ?
निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क
उत्तर प्रदेश सरकार ने काम्पिल्य को महाभारत सर्किट के तहत “वर्ल्ड क्लास टूरिस्ट हब” बनाने के लिए 4.70 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। लेकिन इस परियोजना को लेकर उत्साह के साथ-साथ कई सवाल भी उठ रहे हैं—क्या इतने सीमित बजट में वास्तव में वैश्विक स्तर का पर्यटन केंद्र विकसित हो पाएगा?
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने दावा किया है कि द्रौपदी जन्मस्थली सहित पौराणिक स्थलों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाएगा और इंटरैक्टिव इंस्टॉलेशन के जरिए महाभारत कालीन घटनाओं को जीवंत किया जाएगा। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित परियोजनाओं के लिए केवल स्थापना नहीं, बल्कि रखरखाव और निरंतर अपडेट भी जरूरी होता है—जिस पर अक्सर योजनाएं कमजोर पड़ जाती हैं।
योजना के तहत रामेश्वर नाथ मंदिर के लिए भव्य प्रवेश द्वार, टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर और स्टोन स्टोरी बोर्ड जैसे कार्य प्रस्तावित हैं। हालांकि, स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं—सड़क, सफाई, यातायात और सुरक्षा—की स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
सरकार का दावा है कि वर्ष 2025 में 21.67 लाख पर्यटक फर्रुखाबाद पहुंचे, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस संख्या के अनुरूप इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो पाया है? अक्सर देखा गया है कि पर्यटन स्थलों पर निवेश तो होता है, लेकिन दीर्घकालिक योजना और निगरानी के अभाव में परिणाम अपेक्षित नहीं मिलते।
इतिहास और आस्था से जुड़े इस महत्वपूर्ण स्थल को विकसित करने की पहल सराहनीय जरूर है, लेकिन “वर्ल्ड क्लास” जैसे बड़े दावे तभी सार्थक होंगे जब योजनाएं कागज से निकलकर जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हों।
कुल मिलाकर, काम्पिल्य के विकास की यह योजना उम्मीदें तो जगाती है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन और स्थायित्व पर ही इसकी असली परीक्षा टिकी है।



