₹20 लाख तक बिना गारंटी लोन, डिजिटल फ्रॉड पर सख्ती—बैंकिंग सेक्टर में नई क्रांति
RBI का बड़ा सुधार पैकेज: डिजिटल सुरक्षा, लोन नियम और बाजार ढांचे में व्यापक बदलाव

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |
Reserve Bank of India (RBI) ने विकासात्मक और नियामकीय नीतियों का व्यापक खाका पेश करते हुए बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन और बाजार ढांचे में बड़े सुधारों की घोषणा की है। यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत, सुरक्षित और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नियामकीय सुधारों के तहत RBI ने वित्तीय उत्पादों की गलत बिक्री (मिस-सेलिंग) पर सख्ती दिखाते हुए बैंकों और अन्य विनियमित संस्थाओं के लिए नए दिशा-निर्देश लाने का फैसला किया है। साथ ही, लोन रिकवरी एजेंट्स के व्यवहार और नियमों को एकसमान करने की तैयारी है, जिससे ग्राहकों के साथ पारदर्शिता और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित हो सके।
डिजिटल युग में बढ़ते साइबर फ्रॉड को देखते हुए RBI ने अनधिकृत डिजिटल ट्रांजेक्शन में ग्राहकों की जिम्मेदारी के नियमों की समीक्षा का निर्णय लिया है। छोटे फ्रॉड मामलों में मुआवजे का प्रावधान और अतिरिक्त सुरक्षा उपाय जैसे वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन जैसे कदम प्रस्तावित हैं।
बैंकिंग और निवेश क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अब बैंकों को Real Estate Investment Trusts (REITs) को लोन देने की अनुमति दी जा सकती है, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को नई पूंजी मिलेगी। वहीं, NBFC सेक्टर में छोटे और कम जोखिम वाले संस्थानों को रजिस्ट्रेशन से छूट देने का प्रस्ताव है, जिससे अनुपालन का बोझ कम होगा।
वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए RBI ने MSME सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए बिना गारंटी लोन की सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख करने का ऐलान किया है। यह कदम छोटे उद्यमियों के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकता है। साथ ही, Kisan Credit Card (KCC) योजना में सुधार कर इसकी अवधि 6 वर्ष तक बढ़ाने और इसे अधिक प्रभावी बनाने की योजना है।
डिजिटल पेमेंट्स की तेजी से बढ़ती दुनिया में RBI ने फ्रॉड रोकने के लिए नए सुरक्षा उपायों पर चर्चा पत्र जारी करने की तैयारी की है। इससे ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और अधिक सुरक्षित हो सकेंगे।
फाइनेंशियल मार्केट्स में, कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को मजबूत करने के लिए डेरिवेटिव्स और नए निवेश विकल्पों को बढ़ावा दिया जाएगा। विदेशी निवेशकों के लिए नियमों में ढील और पारदर्शिता बढ़ाने के कदम भी शामिल हैं।
इसके अलावा, कोऑपरेटिव बैंकिंग सेक्टर को सशक्त बनाने के लिए “मिशन सक्षम” की शुरुआत की जाएगी, जिसके तहत 1.4 लाख से अधिक कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कुल मिलाकर RBI की ये पहलें न केवल बैंकिंग प्रणाली को मजबूत करेंगी, बल्कि ग्राहकों के हितों की रक्षा, निवेश को बढ़ावा और डिजिटल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।



