राष्ट्रीय

बच्चों के खिलाफ अपराधों में डरावना उछाल, देशभर में 1.87 लाख से ज्यादा मामले दर्ज

यूपी, महाराष्ट्र और एमपी बने ‘क्राइम हॉटस्पॉट’, बच्चों की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

देश में बच्चों के खिलाफ अपराधों के बढ़ते मामलों ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2024 के आंकड़ों के अनुसार देशभर में बच्चों के खिलाफ कुल 1,87,702 मामले दर्ज किए गए, जो 2023 के मुकाबले और अधिक हैं। लगातार बढ़ते अपराधों ने यह साफ संकेत दिया है कि तमाम सरकारी दावों के बावजूद बच्चे अब भी सुरक्षित नहीं हैं।

सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र में दर्ज हुए, जहां 24,171 बच्चों से जुड़े अपराध सामने आए। उत्तर प्रदेश 22,222 मामलों के साथ दूसरे स्थान पर रहा, जबकि मध्य प्रदेश में 21,908 मामले दर्ज किए गए। बिहार, तमिलनाडु, कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्यों में भी हजारों मामले दर्ज होने से हालात की गंभीरता उजागर हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाल अपराधों में बढ़ोतरी केवल आंकड़ा नहीं बल्कि सामाजिक विफलता का संकेत है। कई राज्यों में चार्जशीटिंग रेट बेहद कमजोर पाया गया। हरियाणा में अपराध दर 82.8 रही, जबकि दिल्ली में प्रति लाख बच्चों पर अपराध दर 138.4 दर्ज की गई, जो बेहद चिंताजनक मानी जा रही है।

दिल्ली में 7,662 मामले सामने आए, जबकि असम में 2023 के मुकाबले मामलों में तेज उछाल देखने को मिला। यूपी और बिहार जैसे बड़े राज्यों में लगातार बढ़ते मामलों ने बाल सुरक्षा योजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि बच्चों के खिलाफ अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी समाज के लिए खतरे की घंटी है। ऑनलाइन शोषण, मानव तस्करी, यौन अपराध और घरेलू हिंसा जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। कई मामलों में जांच और न्याय प्रक्रिया लंबी होने के कारण पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटकते रहते हैं।

विशेषज्ञों ने सरकार से स्कूल सुरक्षा, साइबर मॉनिटरिंग, फास्ट ट्रैक कोर्ट और बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में हालात और भयावह हो सकते हैं।

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