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सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक सुरक्षा की नई भोर:

सरकार और आरबीआई ने कस दी कमान, एआई और डीपीडीपी कानून से मजबूत हुआ तकनीकी कवच

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क |

देश में तेजी से फलते-फूलते फिनटेक इकोसिस्टम, डिजिटल लोन ऐप और पेमेंट एग्रीगेटरों पर नकेल कसने तथा उपभोक्ता अधिकारों को अभेद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने निर्णायक और कड़े कदम उठाए हैं। लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने बताया कि वित्तीय क्षेत्र के नियामकों और हितधारकों के साथ सतत समीक्षा के बाद डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा, स्व-नियमन (Self-Regulation) और साइबर सुरक्षा को अभूतपूर्व रूप से सशक्त बनाया गया है।

स्व-नियामक ढांचा (SRO-FT) और सख्त डिजिटल सुरक्षा नियंत्रण वित्तीय अखंडता और नैतिक आचरण सुनिश्चित करने के लिए आरबीआई ने स्व-नियामक संगठनों (SRO-FT) के लिए व्यापक ढांचा लागू किया है। इसके अलावा, मोबाइल और वेब ऐप-आधारित वित्तीय खतरों से निपटने के लिए बैंकिंग चैनलों के लिए सुरक्षा नियंत्रण के कड़े न्यूनतम मानक अनिवार्य किए गए हैं।

एआई/एमएल से धोखाधड़ी पर नकेल और डीपीडीपी कानून का सुरक्षा चक्र डिजिटल लेनदेन को सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) अब यूपीआई (UPI) लेनदेन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित उन्नत मॉडलों का उपयोग कर रहा है। इससे संदिग्ध लेन-देन को तुरंत चिन्हित कर खारिज किया जा रहा है। वहीं, डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा ‘डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP)’ और इसके नियमों को प्रभावी रूप से अधिसूचित किया जा चुका है।

अवैध ऐप्स पर साइबर स्ट्राइक: ‘1930’ और ‘सचेत’ पोर्टल बने ढाल अवैध लोन ऐप्स और वित्तीय धोखाधड़ी के शिकार नागरिकों की तत्काल मदद के लिए गृह मंत्रालय का राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) तथा हेल्पलाइन नंबर 1930 मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही, गैर-कानूनी जमा योजनाओं के खिलाफ ‘सचेत’ (SACHET) पोर्टल और ई-बात (eBAAT) जागरूकता अभियानों के माध्यम से वित्तीय समावेशन को धोखाधड़ी-मुक्त बनाने की दिशा में नए मानक स्थापित किए जा रहे हैं।

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