दिव्यांगजनों के पुनर्वास उपकरणों की सुरक्षा और गुणवत्ता पर बड़ा कदम: पुनर्वास विवि और आईपीसी में ऐतिहासिक समझौता

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क,
दिव्यांगजनों को सुरक्षित, मानक और गुणवत्तापूर्ण सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की दिशा में डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक पहल की है। विश्वविद्यालय और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
गुणवत्ता और वैज्ञानिक निगरानी पर साझा अनुसंधान
कुलपति आचार्य संजय सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में हुए इस समझौते का मुख्य उद्देश्य कृत्रिम अंगों, व्हीलचेयर, श्रवण यंत्रों और प्रोस्थेटिक उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा तथा उनके उपयोग के दौरान सामने आने वाली तकनीकी खामियों की वैज्ञानिक निगरानी करना है। दोनों संस्थान मैटेरियोविजिलेंस, संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण और वैज्ञानिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में एक साथ कार्य करेंगे।
नोडल इकाइयाँ तय, वैज्ञानिक विश्लेषण से सुधरेंगे मानक
इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विश्वविद्यालय के ‘कृत्रिम अंग एवं पुनर्वास केंद्र’ तथा ‘फैकल्टी ऑफ फार्मेसी’ को नोडल इकाई नियुक्त किया गया है। ये इकाइयाँ उपकरणों से जुड़ी शिकायतों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर डेटा आईपीसी से साझा करेंगी, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा मानकों में सुधार हो सके।
तकनीकी खामियों का वैज्ञानिक अभिलेखीकरण आवश्यक: कुलपति
कुलपति आचार्य संजय सिंह ने इस साझेदारी को अनुसंधान के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों द्वारा प्रयुक्त उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जनहित में अत्यंत आवश्यक है। वहीं, आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलाईसेलवन ने कहा कि ‘मैटेरियोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया’ (MvPI) के तहत विश्वसनीय वैज्ञानिक आंकड़ों के संकलन में यह सहयोग मील का पत्थर साबित होगा।
इस अवसर पर कुलसचिव रोहित सिंह, एमओयू समन्वयक डॉ. विजय शंकर शर्मा सहित विवि व आईपीसी के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



