कर व्यवस्था में जवाबदेही का नया अध्याय
वित्त मंत्री ने दिया '5R' मंत्र, टैक्स विवाद घटाने और करदाता विश्वास बढ़ाने का आह्वान

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
भारत की कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और करदाता-केंद्रित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा संदेश दिया है। 167वें आयकर दिवस के अवसर पर केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने ‘रिस्पॉन्सिव टैक्स गवर्नेंस’ के 5R मॉडल—पहचानना (Recognise), प्रतिक्रिया देना (Respond), समाधान करना (Resolve), विचार करना (Reflect) और सुधार करना (Reform)—को भविष्य की कर व्यवस्था का आधार बताते हुए कानूनी विवादों को कम करने और टैक्स संबंधी निश्चितता बढ़ाने पर जोर दिया।
करदाता नहीं, विकास के भागीदार
वित्त मंत्री ने कहा कि आयकर विभाग की भूमिका अब केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि वह देश के आर्थिक विकास में साझेदार करदाताओं का भरोसा जीतने वाली संस्था के रूप में विकसित हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईमानदार करदाताओं को सुविधा मिले, अनजाने में हुई त्रुटियों को सुधारने का अवसर मिले और कर प्रशासन संवेदनशील एवं पारदर्शी बने।
आयकर अधिनियम-2025 बना बड़ा सुधार
श्रीमती सीतारमण ने आयकर अधिनियम, 2025 को ऐतिहासिक सुधार बताते हुए कहा कि इससे कानून सरल हुआ है, अनुपालन लागत कम हुई है और कारोबार करने में आसानी को नई मजबूती मिली है। उन्होंने तेज रिटर्न प्रोसेसिंग, शीघ्र रिफंड और शिकायत निवारण में हुई प्रगति को भी उल्लेखनीय बताया।
डिजिटल टैक्स सिस्टम को नई उड़ान
सीबीडीटी ने PAN 2.0, ITBA 2.0, IEC 3.0, कर साथी और सक्षम नज जैसी डिजिटल पहलों के माध्यम से तकनीक आधारित कर प्रशासन को नई दिशा दी है। विभाग ने डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डिजिटल एसेट्स और अंतरराष्ट्रीय कराधान जैसे क्षेत्रों में क्षमता निर्माण पर भी विशेष बल दिया है।
विवाद कम, विश्वास ज्यादा
राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव ने कहा कि नए नियम और सरल फॉर्म करदाताओं के लिए अधिक सहज व्यवस्था तैयार करेंगे। वहीं, सीबीडीटी अध्यक्ष रवि अग्रवाल ने बताया कि अपीलों के त्वरित निपटारे, एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट, तेज रिफंड और शिकायत समाधान के कारण कर व्यवस्था में भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।
छह प्रकाशनों से वैश्विक नेतृत्व का संदेश
समारोह के दौरान वित्त मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय कराधान, क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग, सूचना आदान-प्रदान, एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट और डिजिटल टैक्स प्रशासन से जुड़े छह महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया। यह भारत की आधुनिक, प्रौद्योगिकी-संचालित और वैश्विक मानकों पर आधारित कर व्यवस्था की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



