विदेशी कमाई बढ़ी, लेकिन तस्वीर में छिपी निर्भरता भी गहरी
अदृश्य प्राप्तियों में उछाल के बीच सॉफ्टवेयर, रेमिटेंस और कुछ चुनिंदा सेवाओं पर अर्थव्यवस्था की भारी पकड़

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
विदेश से आने वाली अदृश्य प्राप्तियों (Invisibles Receipts) के आंकड़े भारत की सेवा क्षमता और विदेशी आय की ताकत दिखाते हैं, लेकिन इन्हीं आंकड़ों के भीतर अर्थव्यवस्था की कुछ गंभीर निर्भरताएं भी दिखाई देती हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जून 2026 में अदृश्य प्राप्तियां 1,62,986 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहीं, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में इनकी कुल प्राप्तियां 6,31,620 मिलियन डॉलर दर्ज की गई थीं।
सॉफ्टवेयर पर बड़ा दांव
सेवा प्राप्तियों में सबसे बड़ी भूमिका दूरसंचार, कंप्यूटर और सूचना सेवाओं की रही। अप्रैल-जून 2026 में इस श्रेणी से 52,009 मिलियन डॉलर की प्राप्तियां हुईं, जिनमें अकेले सॉफ्टवेयर सेवाओं का योगदान 51,384 मिलियन डॉलर था। यह एक ओर भारत की तकनीकी ताकत है, लेकिन दूसरी ओर विदेशी मांग और वैश्विक आईटी बाजार में किसी भी बड़े बदलाव के प्रति संवेदनशीलता भी पैदा करती है।
रेमिटेंस का सहारा
दूसरी बड़ी तस्वीर निजी हस्तांतरण की है। अप्रैल-जून 2026 में निजी हस्तांतरण 43,756 मिलियन डॉलर रहे। इसमें विदेशों में रह रहे भारतीयों से परिवार के भरण-पोषण और बचत के लिए आए धन की हिस्सेदारी 30,515 मिलियन डॉलर रही।
कंसल्टिंग पर निर्भरता
अन्य व्यावसायिक सेवाओं में भी बड़ा संकेंद्रण दिखाई देता है। अप्रैल-जून 2026 में इस मद की प्राप्तियां 32,805 मिलियन डॉलर रहीं, जबकि पेशेवर एवं प्रबंधन परामर्श सेवाओं से 25,435 मिलियन डॉलर प्राप्त हुए।
चुनौती भी बड़ी
आंकड़े यह संकेत देते हैं कि विदेशी आय का आधार व्यापक होने के बावजूद कुछ चुनिंदा क्षेत्रों पर अत्यधिक निर्भरता मौजूद है। वैश्विक आईटी मांग, रोजगार बाजार, प्रवासी आय और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी परिस्थितियों में कमजोरी आने पर इन प्राप्तियों पर दबाव पड़ सकता है।
ऐसे में चुनौती केवल विदेशी कमाई बढ़ाने की नहीं, बल्कि उसके स्रोतों को अधिक विविध, टिकाऊ और वैश्विक झटकों से सुरक्षित बनाने की भी है।



