
थाली से लेकर रसोई तक आर्थिक मार से हाहाकार
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
आम जनता की कमर तोड़ने वाले आर्थिक आंकड़ों ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, देश में खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) बढ़कर 5.54 प्रतिशत (अनंतिम) के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। महंगाई के इस तांडव ने आम आदमी के मासिक बजट को पूरी तरह छिन्न-भिन्न कर दिया है। सरकार भले ही आर्थिक विकास के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बढ़ती कीमतों ने आम गृहणियों और मध्यम वर्ग का जीना मुहाल कर दिया है।
सबसे डरावनी तस्वीर खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) की है, जो सितंबर 2026 में साल-दर-साल आधार पर बढ़कर 7.74 प्रतिशत पर जा पहुंची है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति शहरी इलाकों से भी बदतर है, जहां ग्रामीण खाद्य महंगाई दर रिकॉर्ड 8.06 प्रतिशत दर्ज की गई है। खाने-पीने की बुनियादी वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी दूभर हो गया है।

रसोई का बजट ध्वस्त: प्याज, लहसुन और अदरक ने निकाले आंसू
आम आदमी की थाली का स्वाद बिगाड़ने में सब्जियों और मसालों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। सितंबर महीने में महंगाई के मोर्चे पर सबसे खतरनाक उछाल प्याज में देखा गया, जिसकी सालाना महंगाई दर बढ़कर 108.09 प्रतिशत हो गई है। इसके अलावा, लहसुन (54.62%), अदरक (62.85%) और नींबू (36.41%) जैसी रसोई की अनिवार्य वस्तुएं आम आदमी की पहुंच से कोसों दूर हो चुकी हैं। व्यक्तिगत देखभाल और विविध वस्तुओं की श्रेणी में भी महंगाई दर 13.75 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे जीवन यापन की लागत बेकाबू हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक तंत्र की उदासीनता और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण न होने के कारण मुनाफाखोर जनता के खून-पसीने की कमाई लूट रहे हैं। कागजी दावों और चुनावी वादों के बीच पिसती आम जनता पर महंगाई का यह बोझ कब कम होगा, इसका कोई उत्तर किसी के पास नहीं है।




