वित्तीय समावेशन पर सरकार का कड़ा चाबुक:
DFS सचिव संजय लोहिया ने बैंकों के साथ की उच्चस्तरीय समीक्षा,

योजनाओं में कोताही पर सख्त निर्देश!
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
देश के वित्तीय गलियारों से एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव श्री संजय लोहिया ने सार्वजनिक क्षेत्र के तमाम बैंकों (PSBs) के प्रमुखों और प्रमुख निजी क्षेत्र के बैंकों के कार्यकारी निदेशकों के साथ एक उच्चस्तरीय और बेहद गंभीर समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस महामंथन का मुख्य केंद्र देश की रीढ़ मानी जाने वाली प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएं थीं, जिनमें प्रधानमंत्री जन धन योजना, सुरक्षा बीमा योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, मुद्रा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), पीएम स्वनिधि, पीएम विश्वकर्मा और हाल ही में देश में धूम मचा रही पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शामिल हैं।
बैंकों की कार्यशैली पर कड़े सवाल और सख्त निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान सचिव ने बैंकिंग तंत्र की सुस्त चाल पर कड़ी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि अब खानापूर्ति नहीं चलेगी। बैठक में निम्नलिखित प्रमुख एक्शन पॉइंट्स पर मुहर लगाई गई:
- डिजिटल क्रांति और क्रेडिट विस्तार: बैंकों को अपनी डिजिटल क्षमताओं को अपग्रेड करने, एंड-टू-एंड डिजिटल प्रक्रियाएं सुनिश्चित करने, यूपीआई पर क्रेडिट लाइन्स के जरिए कार्यशील पूंजी का विस्तार करने और सूक्ष्म उद्यमों के लिए क्रेडिट कार्ड (CCME) के प्रदर्शन में तत्काल सुधार लाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
- भौतिक पहुंच और शत-प्रतिशत कवरेज: चिन्हित गांवों में ईंट-गारे की शाखाओं (brick-and-mortar branches) के निर्माण कार्य को युद्धस्तर पर पूरा करने तथा असिंचित व अनबैंक्ड गांवों में 100% बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स (BCs) की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने को कहा गया है।
- निजी बैंकों की भागीदारी अनिवार्य: वित्तीय समावेशन (FI) की इन राष्ट्रीय योजनाओं में केवल सरकारी बैंकों पर बोझ डालने के बजाय निजी क्षेत्र के बैंकों को भी अपनी सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की सख्त हिदायत दी गई है।
- बीमा दावों का पारदर्शी निपटारा: जनसुरक्षा बीमा योजनाओं के तहत दावों के समय पर भुगतान, ग्राहकों में जागरूकता फैलाने और शिकायतों का संवेदनशील तरीके से समाधान करने पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही, जनसुरक्षा पोर्टल का उपयोग कर सटीक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है।
आगामी ‘एफआई सैचुरेशन अभियान’ का शंखनाद
बैठक के अंत में सचिव श्री संजय लोहिया ने सभी बैंकों से आह्वान किया वे आगामी 21 अक्टूबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक DFS द्वारा आयोजित किए जाने वाले देशव्यापी ‘वित्तीय समावेशन संतृप्ति अभियान’ (FI Saturation Campaign) में पूरी तन्मयता से भाग लें। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के अति-वंचित और हाशिये पर खड़े वर्गों की बैंकिंग जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना है।



