पीएनबी के सतत वित्त शिखर सम्मेलन में जलवायु-अनुकूल अर्थव्यवस्था का रोडमैप
वित्तीय क्षेत्र की साझा पहल पर जोर, जलवायु जोखिम और वित्तपोषित उत्सर्जन पर हुआ मंथन

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
भारत की अर्थव्यवस्था को सतत, जिम्मेदार और जलवायु-अनुकूल बनाने की दिशा में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने वित्तीय क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाकर महत्वपूर्ण पहल की। बैंक के द्वारका स्थित कॉर्पोरेट कार्यालय में प्रथम सतत वित्त नेतृत्व शिखर सम्मेलन 2026 और तृतीय पीसीएएफ इंडिया एक्सेलरेटर सत्र का आयोजन किया गया। सम्मेलन में नियामक संस्थाओं, सार्वजनिक एवं निजी बैंकों, विकास वित्त संस्थानों, कॉर्पोरेट जगत और सतत विकास संगठनों के प्रतिनिधियों ने भविष्य की वित्तीय चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
जलवायु जोखिम बना वित्तीय विमर्श का केंद्र
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वित्तीय निर्णयों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी और स्थिरता को प्रभावी ढंग से शामिल करना रहा। चर्चा में जलवायु जोखिम, जिम्मेदार बैंकिंग, प्रकृति से जुड़े जोखिमों और वित्तपोषित उत्सर्जन के आकलन जैसे विषय प्रमुखता से उभरे। संदेश स्पष्ट था कि आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने के साथ पर्यावरणीय जोखिमों की अनदेखी अब वित्तीय संस्थानों के लिए व्यवहारिक विकल्प नहीं रह सकती।
नियामक दृष्टिकोण पर विशेष चर्चा
उद्घाटन सत्र में पीएनबी की मुख्य समूह जोखिम अधिकारी मौसमी मजूमदार ने बैंक की सतत विकास यात्रा और भावी रणनीति प्रस्तुत की। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के भारत प्रमुख डॉ. बालकृष्ण पिसुपति ने सतत वित्त की आवश्यकता पर विचार रखे। भारतीय रिजर्व बैंक के सतत वित्त समूह के प्रमुख एवं उप महाप्रबंधक साकेत कुमार ने जलवायु जोखिम और सतत वित्त के नियामकीय दृष्टिकोण पर विशेष व्याख्यान दिया।
वित्तीय संस्थानों की जवाबदेही पर जोर
‘भारत में सतत वित्त की आगे की राह’ विषयक नेतृत्व पैनल में बैंकिंग, विकास वित्त, उद्योग, नवीकरणीय ऊर्जा और स्थिरता क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने वित्तपोषण के अवसरों तथा चुनौतियों पर चर्चा की। उद्देश्य सतत परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने और संस्थागत सहयोग को मजबूत करना रहा।
उत्सर्जन का हिसाब, जवाबदेही की कसौटी
तृतीय पीसीएएफ इंडिया एक्सेलरेटर सत्र में वित्तीय संस्थानों की वित्तपोषण गतिविधियों से जुड़े उत्सर्जन को मापने और रिपोर्ट करने की तकनीकी एवं संस्थागत क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने वित्तपोषित उत्सर्जन लेखांकन की पद्धतियों, व्यावहारिक उदाहरणों और भारतीय वित्तीय परिदृश्य में इनके उपयोग पर जानकारी साझा की। सम्मेलन में पीएनबी के कार्बन पदचिह्न के आकलन को भी शामिल किया गया।
सहयोग से सतत भविष्य की ओर
यूएनईपी एफआई, क्रेडिट एग्रीकोल कॉर्पोरेट एंड इन्वेस्टमेंट बैंक, क्लाइमेट रिस्क होराइजन, स्टेप चेंज और ईवाई सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने ज्ञान सत्रों का नेतृत्व किया। समापन पीएनबी के महाप्रबंधक प्रताप केशरी मल्लिक के संबोधन से हुआ।
पीएनबी ने इस आयोजन के माध्यम से सतत वित्त, ज्ञान साझाकरण और संस्थागत क्षमता निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। हालांकि, ऐसी पहलों की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि सम्मेलन में हुई चर्चाएं किस सीमा तक ठोस वित्तीय नीतियों, पारदर्शी उत्सर्जन आकलन और जलवायु-अनुकूल निवेश में बदलती हैं।



