हिमालय के प्रहरी: कीलोंग में आईसीएमआर के उच्च तुंगता चिकित्सा केंद्र की आधारशिला
विज्ञान और संकल्प का संगम: दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का ऐतिहासिक कायापलट

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
भारत की सामरिक और भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील हिमालयी गोद में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल प्रदेश के कीलोंग में ‘आईसीएमआर सेंटर फॉर हाई एल्टीट्यूड मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ रिसर्च’ का भूमि पूजन कर आधारशिला रखी। यह विशिष्ट अनुसंधान केंद्र अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन स्तर और पर्वतीय जीवन शैली जैसी अनूठी स्वास्थ्य चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान खोजने में मील का पत्थर साबित होगा।
सशस्त्र बलों और विज्ञान का संयुक्त शंखनाद: सैनिकों और सीमावर्ती नागरिकों को मिलेगा सुरक्षा कवच
- सशस्त्र बलों का सहयोगात्मक अनुसंधान: इस केंद्र की स्थापना में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (एएफएमएस) के बीच मजबूत समन्वय स्थापित किया गया है, जो अत्यधिक ऊंचाई पर तैनात सैनिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए विशेष चिकित्सा प्रोटोकॉल तैयार करेगा।
- ए्सआईएमएस बिलासपुर की सहभागिता: इस अनुसंधान श्रृंखला में एम्स बिलासपुर भी अपनी नैदानिक विशेषज्ञता के साथ जुड़कर पर्वतीय क्षेत्रों में आने वाले रोगियों पर उच्च तुंगता के प्रभावों का गहन अध्ययन करेगा।
- आधुनिक तकनीक का समावेश: दूरदराज के क्षेत्रों तक स्वास्थ्य पहुंच सुगम बनाने के लिए ड्रोन-आधारित दवा वितरण, डिजिटल स्वास्थ्य और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
दूरदर्शिता और भविष्य की रूपरेखा: जनजातीय समुदायों और मानवता के लिए वरदान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप यह संस्थान सीमावर्ती और जनजातीय क्षेत्रों के लोगों की विशिष्ट स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करेगा। रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने इस पहल को रक्षा और चिकित्सा विज्ञान का अनूठा संगम बताया। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री जयराम ठाकुर और मंडी की सांसद सुश्री कंगना रनौत ने इस अभूतपूर्व पहल की सराहना करते हुए कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी और यह शोध केंद्र हिमाचल सहित संपूर्ण हिमालयी राज्यों—लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के निवासियों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने स्पष्ट किया कि कीलोंग का यह केंद्र प्रयोगशाला और समुदाय का ऐसा जीवंत संगम बनेगा जहाँ वास्तविक धरातल पर स्वास्थ्य सुधार के लक्ष्य हासिल किए जाएंगे। इस अवसर पर हरित परिसर पहल के तहत पौधे रोपे गए, वैज्ञानिक प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ और विशेष आवरण का विमोचन किया गया।



