बाराबंकी के गोतौना में एनबीएफजीआर का महा-अभियान; ‘मेरा गाँव मेरा गौरव’ से बदलेगी किसानों की तकदीर!
सायनों को कहें 'ना', जैविक को अपनाएं; वैज्ञानिकों ने दिया 'खेत बचाओ' का धुआंधार नारा, किसानों ने लिया संकल्प!

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
बाराबंकी जनपद के हैदरगढ़ स्थित ग्राम गोतौना में गुरुवार को कृषि और पर्यावरण सुधार की दिशा में एक बहुत बड़ा और धुआंधार बदलाव देखने को मिला। राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएफजीआर) द्वारा ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ और ‘खेत बचाओ अभियान’ का एक बेहद सफल और क्रांतिकारी आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत को सशक्त बनाना और हमारी मिट्टी की सेहत को रसायनों के जहर से बचाना था।
इस महा-अभियान में कृषि जगत के दिग्गज वैज्ञानिकों की फौज जमीन पर उतरी। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अजेय कुमार पाठक, डॉ. रेखा देवी चक्रवर्ती, तकनीकी अधिकारी डॉ. रंजन सिंह, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. अश्विनी सिंह, वैज्ञानिक डॉ. अर्चित शुक्ला और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. कामता प्रसाद ने किसानों को सीधे संबोधित किया। वैज्ञानिकों ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है जब हमें रासायनिक उर्वरकों (केमिकल खाद) पर अपनी निर्भरता को खत्म करना होगा और जैविक व प्राकृतिक खेती की तरफ मजबूती से कदम बढ़ाने होंगे।
ग्राम प्रधान श्री नीलेश पाल की गरिमामयी मौजूदगी में ग्रामीणों को भारत सरकार के इस महत्वपूर्ण अभियान के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से समझाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ (सॉइल हेल्थ कार्ड) की मदद से किसान कैसे वैज्ञानिक तरीके से खेती कर सकते हैं, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ेगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। इसी कड़ी में डॉ. कामता प्रसाद ने गन्ने की उन्नत और बंपर कमाई देने वाली किस्मों की जानकारी दी और गन्ने की बीमारियों को जड़ से खत्म करने के उपाय बताए।
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों की टीम ने प्रगतिशील किसान श्री अशोक सिंह के खेतों का दौरा कर लाइव निरीक्षण किया और तकनीकी गुर सिखाए। इस चौपाल में गांव के लगभग 20 प्रगतिशील किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और कार्यक्रम के अंत में पूरी ईमानदारी से संकल्प लिया कि वे जैविक खेती को अपनाकर अपनी धरती मां और पर्यावरण की रक्षा करेंगे।



