खेती-किसानी

खेत बचाओ अभियान: बंजर होती जमीन पर वैज्ञानिकों की चेतावनी

संतुलित उर्वरक और प्राकृतिक खेती अपनाने का किसानों को संदेश

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीएफजीआर), लखनऊ द्वारा गोसाइंगंज ब्लॉक के ठाकुरपुर गांव में “मेरा गांव मेरा गौरव” कार्यक्रम के तहत खेत बचाओ अभियान एवं मृदा स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों को चेताया कि यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध उपयोग खेतों की उर्वरा शक्ति को कमजोर कर रहा है। इससे मिट्टी में पोषक तत्वों का असंतुलन पैदा हो रहा है और कई क्षेत्रों में भूमि बंजर होने की स्थिति बन रही है। विशेषज्ञों ने किसानों को नैनो यूरिया, नैनो डीएपी तथा संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए प्रेरित किया।

वैज्ञानिकों ने गोबर की खाद, कम्पोस्ट, जैव उर्वरक, हरी खाद और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही खेती और मत्स्य पालन को एकीकृत कर किसानों की आय बढ़ाने के उपाय बताए गए। किसानों को तिलहन मिशन, दलहन मिशन, प्राकृतिक खेती, मृदा परीक्षण और स्वास्थ्य कार्ड योजनाओं की जानकारी भी दी गई।

कार्यक्रम में किसानों ने नहरों में समय पर पानी न मिलने, जलभराव, नीलगाय और छुट्टा पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान जैसी समस्याएं भी उठाईं। मत्स्य पालकों को रोग प्रबंधन तथा किसानों को सौर ऊर्जा पंप योजनाओं के प्रति जागरूक किया गया।

गांव प्रधान प्रवेश कुमार वर्मा सहित 60 लोगों ने कार्यक्रम में भाग लिया। एनबीएफजीआर की टीम में डॉ. शरद कुमार सिंह, डॉ. ताराचंद और डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा ने किसानों को टिकाऊ कृषि और मृदा संरक्षण के महत्व पर जानकारी दी।

कार्यक्रम के अंत में किसानों ने आने वाली पीढ़ियों के लिए खेतों और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बचाने का संकल्प लिया।

Related Articles

Back to top button