आयुष चिकित्सा को मिलेगा वैश्विक डिजिटल पहचान तंत्र
डब्ल्यूएचओ के साथ मिलकर बनेगी आयुर्वेद-यूनानी की नई कोडिंग प्रणाली

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क
आयुष मंत्रालय ने आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसी उद्देश्य से 25 और 26 मई 2026 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से दो दिवसीय उच्च स्तरीय ऑनलाइन परामर्श बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के अंतर्राष्ट्रीय वर्गीकरण (ICHI) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य हस्तक्षेप संहिता (NHIC) के विकास पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी (ASU) चिकित्सा पद्धतियों के उपचार और प्रक्रियाओं के लिए एक मानकीकृत कोडिंग प्रणाली तैयार करना है। इससे पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने में मदद मिलेगी। साथ ही विभिन्न देशों के बीच स्वास्थ्य डेटा के आदान-प्रदान, शोध कार्यों और बीमा सेवाओं में भी आसानी होगी।
बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने की। उन्होंने कहा कि यह पहल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को डिजिटल और वैज्ञानिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे आयुष सेवाओं की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता आएगी।
बैठक में आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा प्रणालियों के लिए अलग-अलग तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें विशेषज्ञों ने चार स्तरीय कोडिंग प्रणाली पर विस्तृत चर्चा की। आयुर्वेद से जुड़े कोडिंग मॉडल को सीसीआरएएस के महानिदेशक प्रो. वैद्य रबीनारायण आचार्य ने प्रस्तुत किया, जबकि सिद्ध और यूनानी चिकित्सा प्रणाली के प्रारूप भी विशेषज्ञों के सामने रखे गए।
डब्ल्यूएचओ के तकनीकी विशेषज्ञों और भारत के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिकों ने इस बैठक में हिस्सा लिया। लगभग 30 वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने मसौदा दस्तावेजों की तकनीकी समीक्षा की और सुझाव दिए।
आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस बैठक में तैयार किए गए प्रारूप को जुलाई 2026 में होने वाली WHO-ICHI ASU अल्फा ड्राफ्ट संपादकीय कार्यशाला में अंतिम रूप देने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।



